छत्तीसगढ़ गठन के दौरान छत्तीसगढ़ के सफेद शेर के यहाँ तत्कालीन राजा की ठुकाई के बाद जोगिया रंग में रंगे छत्तीसगढ़ में भय भूख और भ्रष्टाचार के आतंक से थर्रायी जनता ने पहले चुनाव में ही विकास की आस में कमल खिलाया था ।
मरीजो की नब्ज टटोल उनकी बीमारी का इलाज करने वाले डॉ साहब ने छत्तीसगढिहा मनखे की नब्ज पकड़ राज्य में 15 सालों तक राज किया साथ ही विकास की गाथा लिखने में कोई कोर कसर नही छोड़ी किंतु रमन राज में बेलगाम होती अफसरशाही , कार्यकर्ताओ की अनदेखी ने भाजपा की लुटिया डुबो दी और 15 साल के वनवास के बाद फिर कांग्रेस सत्ता की मलाईदार कुर्सी तक पहुंची जरूर पर राज्य में मुफ्तखोर बनाती योजनाओं से खजाने की बिगड़ती माली हालत , बेलगाम कार्यकर्ता , राजा साहब और कका के बीच का शीतयुद्ध , भ्रष्टाचारीयो की जुगलबंदी , पीएससी भर्ती घोटाला , कोयला ,शराब , गोबर , रेत , परिवहन , दवा जैसे न जाने कितने घोटालों में बेलगाम होती अफसरशाही व नेतागिरी से त्रस्त जनता ने कांग्रेसी सरकार को मुफ्तखोरी की योजनाओं दावे और वादों के बावजूद 5 साल में ही सत्ता से उतार फेंका और पुनः भाजपा के हाथों में सत्ता के गलियारे की चाबी सौंप साय सरकार से सांय सांय विकास की उम्मीद की है ।
सांय सांय सरकार के लगभग 2 साल गुजरने को है किंतु मुफ्तखोरी की योजनाओं से बिगड़ी सरकारी खजाने की हालत किसी से छुपी नही है । सरकारी खजाने को भरने शराब का विरोध करते करते भाजपाई सरकार भी शराब ठेकेदार (दुकानदार) बन बैठी है । बिजली बिल हॉफ की योजना भी सरकारी खजाने के लिए जुगाड़ और महतारी वंदन की चिंता में बन्द हो चुकी है । उद्योग बन चुके ट्रांसफर के खेल के भी क्या कहने सरकार द्वारा ट्रांसफर के लिए हटाई गई प्रतिबंध की समय सीमा के बाद भी समन्वय के नाम पर थोक में रोज आदेश जारी हो रहे ।
कांग्रेसी सरकार के गोबर घोटाले का गोठान बन्द पड़ा है गौमाता सड़को पर मरने मजबूर है । कोर्ट की फटकार भी कागजी घोड़े दौड़ाने में माहिर अफसरों का कुछ नही बिगाड़ पा रही ना गौमाता को मरने से बचा पा रही । अफसरों की मनमर्जी से सनातनी सरकार की बदनामी जरूर हो रही है ।
वैसे विकास को लाने हसदेव , बस्तर के जंगलों की बली दी जा रही है , कटते जंगलों के रास्ते विकास का आना भी तय है । फिर भी लोग और विपक्ष है कि विरोध करते है ।
स्वास्थ्य सेवा घोटालों की सेवा बन गई है , घटिया दवाओं की सप्लाई रोकने सरकार जुटी है किंतु दीमक की तरह सिस्टम में बैठे अफसर बाबू विभाग को खाये जा रहे है । शिक्षा में नए नए प्रयोगों ने शिक्षा का स्तर कागजो में तो बढ़ाया है किंतु आज मिडिल स्कूल के बच्चे ठीक से नाम पता नही लिख पाते । इतनी अच्छी शिक्षा से पढे लिखे अंगूठाछाप ही पैदा होंगे । सड़के है कि बनने से पहले ही उखड़ने लगती है सड़क मरम्मत के नाम पर किसकी मरम्मत होती है सब जानते है । कामो में लेटलतीफी ठेकेदारों के शगल बन गया है । अफसर कागजी दौरों में डीजल पेट्रोल फूंक पर्यावरण बचा रहे है ।
खरीदी में पारदर्शिता के लिये बनाया गया जेम पोर्टल भी अब महंगा हो चला है । बाजार दर से कई गुना ज्यादा दर में जेम पोर्टल से सामान मिलता है पर सरकारी आदेश ऐसा है कि यहां खरीदना मजबूरी बन गई है। सरकार के खजाने का पैसा बचे भी तो कैसे जब चहुंओर डकैत नजरें गड़ाए बैठे है ।
वैसे भी सत्ता के गलियारे में बस अलीबाबा ही बदलता है चोर तो वही चालीस के चालीस ही रहते है ।
फिर भी साय सरकार में जिस तरीके से भ्रष्टाचारी जेल यात्रा में जा रहे है जो प्रदेश वासियों के लिए एक सुखद खबर है ।
क्रमश : कल चलते चलते :-
(1) चिल्फी आरटीओ बैरियर के अधिकारी कर्मचारी और लठैतों की मनमानी को संरक्षण देने वाले अफसर और नेता कौन ?
(2) चिल्फी बैरियर में पदस्थ अफसरों कर्मियों पर कार्यवाही करने से क्यों कांपते है अफसरों और नेताओं के हाथ ?
(3) आरटीओ बैरियर से अवैध कमाई में हिस्सेदारी के बंटवारे की अफवाह क्या सच है या कोरी अफवाह ?
और अंत मे :-
कोई रह गया हो इल्जाम तो वो भी लगा दो,
अरे हम तो पहले भी बुरे थे थोड़ा बुरा और बना दो ।
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