लालच में अंधा हो चुका है इंसान : युवाचार्य महेंद्र ऋषि

Posted On:- 2022-06-04



रायपुर (वीएनएस)। लालच में इंसान आज इस कदर अंधा हो चुका है कि मां कही जाने वाली गायों को भी नहीं छोड़ रहा। ज्यादा दूध निकालकर अधिक कमाई करने के लिए गायों को तरह-तरह के इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। इससे गायों को तो परेशानी होती ही है। दूध की गुणवत्ता भी कम हो रही है। टैगोर नगर स्थित श्री लालगंगा पटवा भवन में विराजित श्रमण संघ के युवाचार्य परम पूज्य महेंद्र ऋषि म.सा. ने उपरांक्त विचार रखे। उन्होंने कहा, बाजारवाद की इस दुनिया ने मां के दूध को भी नहीं छोड़ा। विज्ञापनों में बड़े-बड़े शब्दों में यह लिखा होता है कि इस प्रोडक्ट में है मां के दूध जैसा पोषण। साइंस भी इस बात को मानता है कि कुछ ऐसे विशेष पोषक तत्व होते हैं जो सिर्फ मां के दूध में ही मिलते हैं। ये व्यक्ति को जीवनभर विभिन्न तरह की बीमारियों से सुरक्षित रखते हैं। यह कहा जा सकता है कि मां का दूध किसी भी वैक्सीन से सैकड़ों गुना ताकतवर है। भागदौड़ भरी इस दुनिया में आज कई मासूम मां के दूध से वंचित हो रहे हैं। ऐसी सभी माताओं को एक बार यह विचार जरूर करना चाहिए कि वे क्या वे अपने बच्चों के साथ न्याय कर रहीं हैं। बच्चों को ममता दें। खुद से दूर न करें।

संयम गरम लावे की नदी समान है मजबूत व्यक्ति ही इसे अपनाता है:  गुरुदेव ने कहा, एक बार महाराज श्रैणिक की अनादि मुनि से भेंट हुई। उन्होंने मुनि से कहा, इस उम्र में आप क्यों इस तरह के कष्टों को भोग रहे हैं। मेरे साथ आइए। सभी प्रकार के भोगों को भोगकर सुख की प्राप्ति करिए। अनादि मुनि द्वारा श्रैणिक महाराज को समझाए गए संयम के महत्व को बताते हुए गुरुदेव ने कहा, संयम उस वैतरणी नदी के समान है जिसमें पानी नहीं गरम लावा बहता है। ऐसी दुर्गंध कि जिसे सह पाना नामुमकिन हो जाए। मजबूत व्यक्ति ही संयम अपना सकता है। हमारी आत्मा जन्म जन्मांतर से इस मृत्य लोक में भ्रमण कर रही है। 84 लाख योनी में नाना प्रकार के कष्टों को सहने के बाद हमने ये दुर्लभ मानव तन को प्राप्त किया। आत्मा को मानते सब हैं, लेकिन जानता कोई नहीं। जो व्यक्ति आत्मा को जान जाता है वह मानव जीवन का महत्व भी समझ जाता है। फिर वह व्यक्ति कभी किसी के लिसए दुर्भावना नहीं रख सकता। वह कभी किसी को अच्छा या बुरा नहीं कर सकता। वह स्वयं पर ध्यान देता है। दूसरों पर नहीं।

आपने क्यों दूसरों का ठेका ले रखा है, सबसे आसान काम सलाह देना, न दें :  दुनिया का सबसे आसान काम सलाह देना है। जब खुद की बारी आए तो अच्छे अच्छों के पसीने छूट जाते हैं। जब खुद का पता नहीं तो बाहर भटकने से क्या फायदा। 9 तत्वों में सबसे पहले आत्म तत्व को बताया गया है। इसके लिए सबसे पहले परमात्मा के पास जाएं। एकांत में आत्म बोध का प्रयास करें। आत्म बोध होने पर आपको यह पता चलेगा कि दुनिया के सभी जीव भी मेरे ही समान हैं। यहीं से असल मायने में अहिंसा के भाव जागृत होंगे और आप कभी किसी को मन-वचन और कर्म से दुख नहीं पहुंचाएंगे।

दोपहरभर संस्कार शिविर, रात में हो रही ज्ञान चर्चा : रायपुर श्रमण संघ के संरक्षक डाॅ अनिल कर्णावत, अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया कि शनिवार को धर्मसभा में परमपूज्य हितेंद्र ऋषि जी म.सा., साध्वी सन्मति जी म.सा. आदि ठाणा 5 ने भी समाजजनों को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। दोपहर में बच्चों और महिलाओं के लिए संस्कार शिविर का आयोजन किया गया जहां उन्हें पूजा-पाठ, ध्यान, साधना आदि सिखाया गया। रात में पुरुषों के लिए ज्ञान चर्चा का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में लोग बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।