क्रिकेट के मैदान कुछ दशक पहले तक भले ही कुछ शहरों के क्रिकेट के खिलाडियों के लिए होते थे,जैसे राजनीति में परिवारवाद चलता है वैसे ही कुछ दशक पहले तक शहरवाद चलता था यानी कि किसी शहर का खिलाड़ी होने पर क्रिकेट के मैदान में उसका प्रवेश संभव होता था
हर राज्य में निकाय चुनाव होते हैं तो माना जाता है कि उसमें जो सत्तारूढ़ दल है, वही ज्यादा सीटें जीतता है। लेकिन यह भी राज्य का एक अहम चुनाव होता है, हर राजनीतिक दल के लिए निकाय चुनाव अपने जनाधार को जानने व बढ़ाने का मौका होता है
अपनी सरकार होती है तो हर राजनीतिक दल के नेता व कार्यकर्ताओं को लगता है कि प्रशासन को उसका कहना मानना चाहिए,पुलिस को वही करना चाहिए जो वह चाहते हैं।यह होता तो गलत है लेकिन उनको गलत नहीं लगता है क्योंकि उऩका मानना रहता है कि हमारी सरकार है तो प्रशास...
कर्नाटक में छत्तीसगढ़ की तरह सीएम पद के विवाद को भविष्य के लिए टालने कांग्रेस आलाकमान ने सिध्दारमैया को सीएम बना दिया था। शिवकुमार भी सिध्दारमैया के बाद ढाई साल सीएम बने रहने के लिए तैयार हो गए।
किसी देश या राज्य में संतों का आगमन तो शुभ माना जाता है।कहा जाता है कि राज्य के लोगों को सौभाग्य है जो यहां संत महात्मा आते हैं। हर राज्य में जब संत महात्मा आते हैं तो लोगों को उनके प्रवचन से लाभ होता है।वह जानते समझते हैं कि इस जीवन में अच्छा व ब...
भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय समागम में देश भर से आए हजारों जनजातीय प्रतिनिधि जुटे। उऩका यह जुटाव इस बात का संकेत हैं कि जनजातीय समाज सबसे बड़े खतरे धर्मांतरण के प्रति सजग है और वह चाहता है कि समाज को इस खतरे से बचाव के...
हर क्षेत्र में कोई आदमी हो,संस्था हो जब वह कोई काम खुद नहीं कर पाता है तो वह उम्मीद करता है कि कोई दूसरा उस काम को करके दिखा सकता है।असफल आदमी व संस्थाएं ऐसे आदमी व संस्थाओं की तलाश में रहती है, इंतजार मे रहती है कि वह मिले या सामने आए तो वह उसका ...
लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी की बहुत बात होती है इसे व्यक्ति का अधिकार माना जाता है। आजादी व अधिकार जैसे शब्दों के कारण सामान्य आदमी से लेकर बड़े बड़े पदों पर बैठे हुए लोगों को लगता है कि वह कभी भी,कहीं भी,किसी के प्रति भी कुछ भी कह सकते हैं।
बस्तर से नक्सलवाद का खात्मा हो चुका है, बड़े ब़ड़े नक्सली नेता या तो मारे जा चुके हैं या उन्होंने सरेंडर कर दिया है।नक्सली गतिविधियां अब बस्तर में बंद हो चुकी हैं।बस्तर के विकास का यह तो एक चरण था। इतना कर देने से ही बस्तर में सब कुछ अच्छा नहीं सक...
किसी राज्य या किसी शहर में कानून व्यवस्था का सवाल तब तो उठता ही है जब आम लोगों के साथ आए दिन लूट या छिनताई की घटना हो जाए लेकिन कानून व्यवस्था पर सवाल तब जोर शोर से उठता है कि जब किसी वीआईपी से लूट का छिनताई हो जाए