अमेरिका-ईरान के बीच पीस डील हो चुकी है। जी7 समिट से लेकर ट्रुथ सोशल से लगातार वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को निशाने पर लेते आए हैं।
अब अमेरिका के अस्थिर स्वभाव वाले राष्ट्रपति के साथ काम करने के खतरों का एहसास हो गया है, क्योंकि पाकिस्तान और उसके समर्थक तब मझधार में रह गए जब डोनाल्ड ट्रंप ने 17 जून को वर्साय में एक शानदार डिनर के दौरान अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए और 1...
ट्रंप और मेलोनी की मुलाक़ात फ्रांस के एवियन में 15 से 17 जून तक हुई G7 समिट में हुई। ईरान में युद्ध को लेकर इस साल पैदा हुए तनाव के बाद, दक्षिणपंथी विचारधारा वाले इन दोनों नेताओं ने अपने पहले से बिगड़े हुए रिश्तों को फिर से ठीक कर लिया था।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ तकनीकी बातचीत के लिए स्वीट्जरलैंड जाने वाले थे। फिलहाल इस योजना को टाल दिया गया है। हालांकि व्हाइट हाउस ने कहा है कि बातचीत की तैयारी जारी है
भारत के बिमल पटेल को इंटरनेशनल लॉ ऑफ सी ट्रिब्यूनल (अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून न्यायाधिकरण) का न्यायाधीश निर्वाचित किया गया है। उनके चुनाव के बाद वे गुरुवार को यहां यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी के हस्ताक्षरकर्ता देशों द्वारा चुने जाने ...
ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच एक समझौता किया गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने डिजिटल माध्यम से ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में वर्चस्व की जंग दिन-ब-दिन दिलचस्प होती जा रही है। इस रेस में दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) को एक ऐसा करारा झटका लगा है, जिसकी भरपाई करना शायद आसान न हो
प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय मुलाकातों का जिक्र करें तो आपको बता दें कि उनकी संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान के साथ हुई मुलाकात ने भारत और पश्चिम एशिया के बीच बढ़ती रणनीतिक निकटता को और मजबूत किया।
G7 समिट के आउटरीच सेशन के दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात हुई, उन्होंने एक-दूसरे का अभिवादन किया और संक्षिप्त बातचीत की। दोनों नेताओं की मुलाकात लगभग डेढ़ साल बाद हुई थी।
ईरान के साथ समझौते पर सहमति के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन दावों का खंडन किया है, जिसमें ईरान को पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर (करीब 28 लाख रुपये) देने की बात कही जा रही है।