कभी बारिश के दिनों में मुख्य मार्ग से संपर्क टूट जाता था। मरीजों को खाट पर लादकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता था और बच्चों की पढ़ाई से लेकर कृषि उपज बेचने तक में कठिनाइयां आती थीं।
कृषि और मजदूरी के साथ बकरी पालन अपनाकर ग्राम खैरी के डकईपारा निवासी सुशीला कुर्रे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में जुटी हैं। छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिले 40 हजार रुपये के ऋण ने उन्हें आजीविका का अतिरिक्त साधन विकसित करने का अवसर दिया है।
बच्चे के पोषण और देखभाल में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना से मिली सहायता ग्राम खरवत के मांझापारा निवासी रचना राजवाड़े के लिए मददगार बनी है। उन्होंने योजना से प्राप्त राशि का उपयोग अपने बच्चे के पोषण आहार और परवरिश में किया है।
जिस जमीन पर परिवार की पीढ़ियां निवास करती आ रही थीं, उसका पट्टा मिलने से ग्राम अंगा निवासी लालप्रसाद साहू के परिवार को मालिकाना हक मिला है। मजदूरी कर तीन सदस्यीय परिवार का भरण-पोषण करने वाले 31 वर्षीय लालप्रसाद के नाम भूस्वामित्व योजना के अंतर्गत 2...
मजदूरी करके तीन सदस्यीय परिवार का भरण-पोषण करने वाले जयकरण सिंह के लिए शासन से मिली 10 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता राहत का सहारा बनी है। नगर पंचायत शिवपुर चरचा निवासी 40 वर्षीय जयकरण ने इस राशि का उपयोग बेटी की पढ़ाई और कर्ज के भुगतान में किया है।
पारिवारिक जीवन में महिलाएं अपने खर्चे के लिए तब तक चिंता नहीं करती हैं जब तक उनके पति साथ होते हैं। वह अपने पति की कमाई पर अपना पूरा हक मानकर खर्च करती हैं।
कृषि और मजदूरी से परिवार का भरण-पोषण करने वाली ग्राम खैरी के डकईपारा निवासी सुनैना कुर्रे अब बकरी पालन के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में जुटी हैं। महिला कोष से मिले ऋण ने उन्हें आजीविका का एक अतिरिक्त साधन अपनाने में मदद की है।
हुनर को अवसर और आर्थिक सहयोग मिले तो वह आजीविका का मजबूत आधार बन सकता है। कोरिया जिले के ग्राम कटोरा निवासी संतोषी प्रजापति अपने मूर्ति निर्माण के हुनर को बिहान की मदद से आगे बढ़ा रही हैं। पांच लाख रुपये का ऋण लेकर वे परिवार के सदस्यों के साथ विभिन...
एक छोटी सी मदद आने वाले भविष्य के लिए कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है इसका जीवंत उदाहरण हैं एक सफल गृहिणी ज्योति। कोरिया जिले के मुख्यालय बैकुण्ठपुर से लगे ग्राम पंचायत खरवत के मांझापारा में रहने वाली ज्योति एक किसान परिवार में रहती हैं। उनके दो बच्चे...
एक छोटी सी मदद जरूरतमंद के लिए कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है इसका जीवंत उदाहरण हैं बिराजो देवी। अपने उम्र के कारण घुटनों के दर्द से परेशान रहने वाली बिराजों को महतारी वंदन की राशि ने अपने इलाज का संबल दे दिया है।