पर्यावरण की चिंता तो बहुत है..

Posted On:- 2022-06-05



...पर्यावरण मतलब होता है कि हमारे आसपास का वातावरण। हमारे आसपास के वातावरण में वह चीज जिससे हम घिरे हुए होते हैं।वह चीज क्या है, वह चीज है हवा। यह न हो तो हम मर जाेएंगे। हवा का आवरण हमारा वातावरण है। इसके बाद मोहल्ला, वार्ड, शहर,जिला, प्रदेश, देश का वातावरण होता है, फिर विश्व, पृथ्वी का वातावरण होता है। हमें लगता है यह वातावरण अलग-अलग होता है लेकिन हकीकत में विश्व का वातावरण एक है। यही वजह है कि विश्व के वातावरण में कुछ बदलाव होता है तो दुनिया के तमाम देश उससे प्रभावित होते हैं। ग्लोबल वार्मिग ऐसी ही समस्या है, यानी मनुष्य समाज की गलतियों के कारण ग्लौबल वार्मिग की समस्या पैदा हुई है। इसकी वजह से जलवायु परिवार्तन हो रहा है, बारिश के मौसम में बारिश नहीं होती है, गर्मी में बहुत गर्मी पड़़ती है, ठंंड में कम ठंंड पड़ती है। यानी मौसम का कोई ठिकाना नहीं रह गया है, इससे देश व दुनिया परेशान है। इसीलिय पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। यानी एक दिन तो लोग उनकी जिंदगी के लिए जरूरी पर्यावरण के प्रति जागरूक रहे, अपने पर्यावकण की चिंता करें। अपने आसपास के लोगों को जागरूक करें। पर्यावरण दिवस पर लोग अपने देश प्रदेश के पर्यावरण की चिंता बहुत करते हैं। बड़े-बड़े लेख लिखे जाते हैं। गोष्ठी. सेमिनार में सरकार की आलोचना की जाती है कि वह पर्यावरण के लिए चिंतित नहीं है। कहीं किसी परियोजना के लिए हजारों प़ेड़ काटे जाने हैं तो सारे पर्यावरण प्रेमी सरकार की घोर आलोचना करते हैं। बताते है इससे राज्य के पर्यावरण का कितना नुकसान होगा। हर आदमी पर्यावरण की चिंता करे यह कोई बुरी बात नहीं है। लेकिन सिर्फ चिंता नहीं करनी चाहिए। अपने पर्यावरण के प्रति जागरूर होना चाहिए। दूसरे लोग पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा रहे है इस बात की चिंता करने की जगह इस बात की चिंता करनी चाहिए कि मैं पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा रहा हूं। दूसरे को पर्यावरण को नुकसान पहंचाने से रोकना कठिन काम है लेकिन खुद पर्यावरण को रोज कितना नुकसान पहुंचा रहे है, उसे रोकना आदमी के हाथ में है इसलिए आदमी खुद पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा रहा है, उसे रोकना ज्यादा आसान है। इसलिए आदमी पर्चावरण सुधार बिजली कम खर्च कर, पेट्रोल डीजल वाले वाहनों का उपयोग कम कर, चौक चौराहों पर गाडी बंद करेके,स्वच्छता के प्रति जागरूक रहकर भी कर सकता है।ज्यादातर लोग पर्यावरण सुधार मतलब यह मानते हैं कि कुछ पौधे लगाना। इसलिए हर आदमी पौधा लगाने का मौका मिलता है तो बहुत सारे पोधे लगा देता है। लगाए गए पौधो की देखभाल ज्यादाकर लोग नहीं करतेहैं। इससे हर साल लगाए 90 प्रतिशत पौधे नष्ट हो जाते हैं। वह पेड़ नही बन पात हैं। पेड़ जीव जंतु सब हमारे पर्यावरण के लिए जरूरी हैं। पौधे लगाना की काफी नहीं है, पौधों को बड़ा करना ज्यादा जरूरी है।। जिस क्षेत्र में जितने जयादा पेड़ होते हैं, उस क्षेत्र का पर्यावरण उतना ही अच्छा होताहै। पेड-पौध कुलिंग सिस्टम का हिस्सा होते हैं। पेड़ पौधे कम हुए क्षेत्र का कुलिंग सिस्टम बिगड़ जाता है इस से क्षेत्र का तामपान असंतुलित हो जात है। ज्यादा आबादी होने के चलते शहर में बड़ी सड़कें जरूरी हो जाता है। बड़ी सड़क मतलब होता है ज्यादा वााहन। ज्यादा वाहन मतबल होता है ज्यादा प्रदूषण। हम ज्यादा प्रदूषण को पौधे लगाकर कम कर सकत ह। हमें पौधे लगाकर अपने पर्यावरण को बहतर बनाना चाहिए । इसके लिए किसी पर्यावरण दिवस की जरूरत नहींहै। इसके लिए अपने घर के आसपास पौधे लगाने चाहिए।उसकी देखभाल बड़े होने तक करनी चाहिए। इससे हमारा पर्यावरण बेहतर होगा। हमारा पर्यावरण सुधरने से पूरी दुनिया का पर्यारण सुधर सकता है। आदमी को हर नेक काम की शुरूआत खुद से करनी चाहिए। यह अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए दूसरा पहले करे फिर मैं करूंगा।