रायपुर (वीएनएस)। छत्तीसगढ़ श्रमण संघ का महासम्मेलन रविवार को टैगोर नगर स्थित लालगंगा पटवा भवन में हुआ। 2 साल बाद हुए इस महासम्मेलन में प्रदेशभर से पदाधिकारियों और श्रावक-श्राविकाओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान समाजहित से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार के क्षेत्र में अपनों को मदद करने के लिए एक कमेटी का गठन भी किया गया है।
2 साल बाद इस महासम्मेलन का आयोजन संघ के युवाचार्य परमपूज्य गुरुदेव महेंद्र ऋषि की रायपुर में उपस्थिति को देखते हुए किया गया था। संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल पटवा, संरक्षक डॉ. अनिल कर्णावत समेत ने बताया कि महासम्मेलन में समाज किस दिशा में जा रहा है, इस पर लंबी चर्चा हुई। इस दौरान कई तरह के बदलावों को लेकर रसुझाव भी आए। इन्हीं में एक प्रस्ताव शिक्षा, चिकित्सा और मेडिकल के क्षेत्र में अपनों को मदद करने का भी था। इसके लिए एक कमेटी बनाने का निर्णय हुआ। इस दौरान समाजजनों ने हर्ष हर्ष जय जिनेन्द्र का नारा बुलंद करते हुए रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा को इस कमेटी की जिम्मेदारी सौंपी गई। अध्यक्ष चुना। उनके मार्गदर्शन में जल्द ही कमेटी जैन छात्र-छात्राओं के लिए राजधानी में सर्वसुविधा युक्त हॉस्टल, जरूरतमंदों को अच्छा इलाज और युवाओं को रोजगार दिलाने की दिशा में काम करेगी।
लोगों को समाज की जरूरत है और साधु-संतों को भी इसलिए एक हों
युवाचार्य महेंद्र ऋषि ने ही ऐसी कमेटी के गठन का प्रस्ताव दिया जो प्रदेशभर में रइहने वाले समाजजनों को एजुकेशन, मेडिकल और इम्पलॉयमेंट में मदद कर सके। उन्होंने इसे साधु-संतों के लिए भी जरूरी बताया क्योंकि इससे एक ऐसा नेटवर्क तैयार होगा जो साधु-संतों के विचरण की समाचारी समूचे प्रदेश तक पहुंचाएगा। इससे साधु-संतों को अपनी परंपराओं का पालन करने में कहीं कोई अड़चन भी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि समाज का कोई व्यक्ति आपको कभी आगे से नहीं कहेगा कि मुझे सहायता की जरूरत है। जरूरत है कि आप उस तक पहुंचें। इसीलिए ऐसी कमेटी बनाई जानी चाहिए जो समस्त मामलों की निगरानी करते हुए समाज के लोगों को सही समय पर मदद उपलब्ध करवा सके।
गुरु के प्रति समर्पण ऐसा हो कि जो कह दिया वो मानना ही है गुरुदेव ने कहा, एक बार एक गुरु ने अपने शिष्य से पास बैठे बिच्छे को पकड़ने कहा। शिष्य ने वैसा ही किया और बिच्छू के डंक से वह वहीं बेहोश होकर गिर पड़ा। कुछ देर बाद उसे होश आया आर उनसे खुद को पहले से बेहतर महसूस किया। असल में गुरु ये बात जानते थे कि उसके भीतर पहले ही कोई जहर है जिसका काट बिच्छू के डंक से होगा। शिष्य ने बिच्छू को छूने से पहले कोई प्रयास नहीं किया। बस गुरु की बात सुनी और उसकी जिंदगी बच गई। इसी तरह आपको भी अपने गुरु के प्रति समर्पण रखना चाहिए। आज लोगों के बीच संवाद का अभाव होता जा रहा है। इस दिशा में भी प्रयास किए जाने की जरूरत है।