मामला तो फंस गया है

Posted On:- 2022-06-06



केद्र व राज्य में अलग-अलग दलों की सरकार हो तो दोनों के बीच कई मामलों को लेकर अनबन होती रहती है। दोनों एक दूसरे पर आरोप लगाते हैं तथा अपना राजनीतिक फायदा साधने की कोशिश करते हैं।। राज्य के दो लाख शासकीय सेवकों की पुरानी पेंशन बहाली योजना राज्य व केंद्र सरकार के बीच फंस गई है। राज्य की भूपेश बघेल सरकार राज्य में पुरानी पेंशन योजना लागू कर दो लाख शासकीय कर्मचारियों को राहत देने के साथ ही चुनाव में राजनीतिक फायदा लेना चाहती थी। केंद्र सरकार ने इसमें इस तरह अडंगा लगा दिया है कि राज्य सरकार के लिए पुरानी पेशन योजना को राज्य में बहाल करना मुश्किल हो गया है। इस योजना को लागू करने के लिए राज्य सरकार ने केद्र की संस्था पीएफआरडीए ने एनपीएस( नवीन अंशदायी पेंशन योजना) का 17240 करोड रुपए देने से इंकार कर दिया है। राज्य सरकार की दलील है कि एनपीएस समाप्त करने का फैसला राज्य सरकार निर्णय है। इसे विधौनसभा में पारित कराया गया है। कैैबिनेट ने मंजूरी दी है और राज्य सरकार नेे गजट नोटिफिकेशन कर दिया है।ऐसे में केंद्र सरकार का यह राशि रोकना ठीक नही है। राज्य के वित्त विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पीएफआरडीए के चेयरमैन व अधिकारियों से फोन पर बात की गई तो उनका कहना था कि हमें राशि वापस करने की अनुमति नहीं है।इस मामले में केंद्र का वित्त विभाग जो निर्णय करेगा। उसका पालन किया जाएगा। इसके बाद राज्य सरकार ने पीएफआरडीए को राशि वापस करने के लिए पत्र लिखा गया है। जिसमें पीएफआरडीएने कहा है कि राज्य को राीशि वापस करने का कोई नियम नहीं है। यह सिर्फ छत्तीसगढ़ का मामला नहीं है राजस्थान का मामला भी ऐसी ही है। छत्तीसगढ़ से पहले राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने राज्य मेंं पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का फैसला किया था। इसके बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने किया था। दोनों सरकारें यह योजना लागू कर कर्र्मचारियों को राहत देने के साथ ही अगले साल चुनाव में राजनीतिक लाभ भी उठाना चाहती थी लेकिन केंद्र के अंडंगे से यह सभव नही लग रहा है। उसने दोनों राज्य सरकारों को पुरानी पेंशन योजना चलाने से मना नहीं किया है। राज्य सरकार चाहें तो चला सकती है लेकिन राज्य सरकार चलाती है तो उन्हें पुराना पैसा नहीं मिलेगा। वह पैसा राज्य सरकार कर्मचारियों को कहां से देगी। राज्य सरकारों ने सोचा था कि यह पैसा मिल जाता तो वह राज्य के काम आ जाता। यह पैसा तो मिला नहीं। अब राज्य सरकार यह पुरानी पेंशन योजना नहीं चलाती है तो राज्य के कर्मचारी उससे नाराज होंगे। यानी राज्य सरकार को चुनाव में जो फायदा होता वह नहीं हो सकता। इस मामले में सीएम भूपेश बगेल ने पीेएम नरेद्र मोदी को पत्र लिखा है तथा जवाब का इंतजार कर रहे हैं। यह भूपेश बघेल की पत्र राजनीति है। अब उन्होंने गेंद पीएम नरेंद्र मोदी के पाले में डाल दी है।यदि जवाब हां में आता है तो सीएम को इसका श्रेय मिलेगा यदि जवाब ना आता है तो भूपेश बघेल पुरानी पेंशन योजना लागू न होने का ठीकरा पीएम नरेद्र मोदी पर फोड़ेगे। वह पीएम को पत्र इसलिए लिखते है कि वहां से जो जवाब आए उसी के आधार पर पीएम मोदी को दोषी ठहराया जाए। पुरानी पेंशन योजना लागू न होने पर राज्य के 2 लाख कर्मचारी भूपेश सरकार से नाराज होंगे तो भूपेश सरकार पुरानी पेंशन लागू न होने के लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहराकर अपना पल्ला झाड़ सकती है। कह सकती है कि राज्य सराकर ने तो पूरी कोशिश की लेकिन केंद्र सरकार ने सहयोग नहीं किया।