सिंहदेव अब खुलकर सामने आए

Posted On:- 2022-06-07



हसदेव अरण्य को लेकर राज्य मेें राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव अब हसदेव अरण्य बचाने के मामले में खुलकर सामने आ गए हैं। कुछ दिन पहले सीएम भूपेश बगेल ने कहा था कि जो लोग हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे हैं वह पहले अपने घरों में बिजली जलाना बंद करें। बिजली बंद करने से उन्हेें हकीकत समझ में आ जाएगी।सीएम ने कहा हसदेव में पेड़ कोयले के लिए काटे जा रहे हैं।कोयला इसलिए जरूरी है कि क्योंकि इसके बिना बिजली नहीं बन सकती। उन्होंने बताया था कि हसदेव प्रोजेक्ट के लिए 8 हजार पेड़ कटने हैं। विररोध करने वाले संख्या ज्यादा बताकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं।इसके बाद टीएस सिंहदेव का एक बयान आया था जिसमें उन्होंने कहा था कि जंगल का विनाश कर कोयला खनन नहीं होना चाहिए। जरूरी है तो ऐसी जगह पर कोयला खनन किया जाना चाहिए जहां जंगल न हों। इसके बाद सोमवार को दिए अपने बयान में टीएस सिंहदेव ने यह स्पष्ट कर दिया वह हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई के मामले में क्षेत्र के लोगों के साथ हैं। यदि क्षेत्र के लोग चाहते हैं कि जंगल की कटाई नहीं होनी चाहिए तो जंगल की कटाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जंगल कटाई का विरोध में आंदोलन का समर्थन करते हुए ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि वह उनके साथ है, यदि उन- पर गोली या डंडा चलाया जाता है तो पहली गोली और पहली डंडा वह खाने को सबसे आगे रहेंगे। आप लोगों की पीड़ा मै राहुल गांधी तक पहुंचाऊंगा। अंबिकापुर टीएस सिंहदेव का क्षेत्र है। वहां ऐसा कुछ भी नहीं हो सकता जो वह नही ंचाहते। ऐसे में अगर कोयला खदान के लिए हसदेव अरण्य के पेड़ो की कटाई होती है तो इससे उनके विधानसभा क्षेत्र के लोग नाराजा होंगे। इससे टीएस सिंहदेव को राजनीतिक रूप से नुकसान होगा। सिंहदेव ऐसा होने नहीं दे सकते।सीएम भूपेश बघेल अब तक हसदेव अरण्य में कोयला खदान के लिए पेड़ो की कटाई के पक्ष में थे। वह सोचते थे कि सीएम के नाते वह जो चाहेंगे वही होगा। मामला कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान का है। अगर छत्तीसगढ़ में कोयला खदान शुरू नहीं हुआ तो उसका खामियाजा राजस्थान को भुगतना पड़ सकता है। भूपेश बघेल एक कांग्रेस शासित राज्य को बिजली संकट से बचाना चाहते हैं। टीएस सिंहदेव अपने क्षेत्र में जंगल की कटाई करवा कर अपना और यहां की कांग्रेस सरकार का राजनीतिक नुकसान नहीं होने देना चाहते है। इसलिए वह जब हसदेव अरण्य बचाओं के समर्थन में खड़े हो गए तथा लाठी गोली वाला बयान जारी कर दिया तो भूपेश सरकार अपने आप जंगल कटाई के लिए लाठी गोली चलानेवाली सरकार हो गई।यानी टीएस सिंहदेव जंगल बचाने वाले तथा सीएम भूपेश बघेल जंगल कटवाने वाले हो गए।ऐसी स्थिति में सीएम भूपेश बघेल ने टीएस सिंहदेव से आमने सामने का टकराव टालने के लिए कहा है कि हसदेव अरण्य मामले में लाठी व गोली की नौबत नहीं आएगी। टीएस सिंहदेव यदि चाहते हैं कि हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाइ नहीं होगी तो नहीं होगी। हसदेव अरण्य में टीएस सिंहदेव की मर्जी के बिना एक पेड़ तो क्या एक डंगाल तक नहीं काटी जाएगी। यही नहीं सीएम भूपेश बघेल ने इस लड़ाई को अपने और सिंहदेव के बीच की लड़ाई न बनने देने के लिए कहा है कि इसके लिए केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन होना चाहिए। भूपेश बघेल राज्य सरकार के खिलाफ चल रहे आंदोलन को केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन बनाना चाहते हैं। वह टीएस सिंहदेव से आमने सामने का टकराव नहीं चाहते है।राज्य में पहली बार ऐसा हुआ है कि टीएस सिंहदेव के खुलकर सामने आने पर भूपेश बघेल सामने से हट गए हैं। क्या यह टीएस सिंहदेव की जीत है।