गुरु की बातें दवा की तरह होती हैं जो कड़वी लगेंगी पर हितकारी भी: युवाचार्य महेंद्र ऋषि

Posted On:- 2022-06-08



रायपुर (वीएनएस)। डॉक्टर आपको कोई दवाई कड़वी या मीठी देखकर नहीं देते। आपके स्वास्थ्य के लिए जो जरूरी हो, वही देते हैं। इसी प्रकार गुरु की बातें भी होती हैं जो हो सकता है कि आपको कड़वी लगें, लेकिन सदैव आपके लिए हितकारी होंगी। श्रमण संघ के युवाचार्य परमपूज्य गुरुदेव महेंद्र ऋषि म.सा. ने उपरोक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि बाह्य सुख-सुविधाओं के लिए हमने अपने भीतर की बेचैनी बढ़ा दी है। लोग व्याधि और उपाधि की बेचैनी से मुक्ति समाधि के बाद ही मिलेगी। जीवन को यूं ही व्यर्थ करने से बेहतर है कि इसका सयदुपयोग करें। आत्म निरीक्षण करें। कर्मों पर ध्यान केंद्रित करें। अपनी गलतियों को पहचानें। सुधार करें। ध्यान रखें कि सकारात्मक चिंतन और अनुशासन के आधा पर ही आपकी अपेक्षाएं पूरी हो सकती हैं।

बच्चों की तरह निश्छल बनें तभी जीवन का आनंद उठाएंगे : संतश्री ने कहा कि हमें बच्चों की तरह निश्छल होना चाहिए। ऐसा कर पाने में सफल हो गए तो आपकी सारी चिंताएं खत्म हो जाएंगी और आप जीवन का असल आनंद उठा पाएंगे। बच्चे और बड़ों में एक बेसिक अंतर नरम और कठोर होना है। बच्चे की हडिडयां नरम होती हैं। कोई फ्रैच्र आ जाए तो जल्दी रिकवर कर लेती हैं। बड़े आदमी के पैर में फ्रैक्चर आ जाए उसे ठीक होने में अधिक समय लगता है। इसी प्रकार बच्चों में मासूमियत होती है। वहीं उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति कठोर बनता जाता है। अब तक जितने भी महापुरुष हुए हैं उनमें एक बात समान रही कि वे उन्होंने अपने भीतर बचपना जीवित रखा था। आपने भी इस गुण को अपने भीतर ला लिया तो जीवन अपना जीवन खुशहाल बना लेंगे