नई दिल्ली (वीएनएस)। हनमंत शिवंकर विक्टरी पोडियम के पास खड़े थे और उनके मन-मस्तिष्क में उस दिन याद ताजा हो गई, जब उन्हें पता चला कि उनकी बेटी एक दौड़ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए चुपके से चली गई थी।खेलो इंडिया यूथ गेम्स की विक्टरी सेरेमनी में अपनी बेटी को प्रशंसा में सराबोर होते हुए उन्होंने बताया कि एक समय दहशत की लहर ने मुझे जकड़ लिया था। हनमंत ने भावनात्मक होते हुए बताया कि उन्हें सुदेशना के बचपन में अस्थमा पीड़ित होने का पता चला था और परिवार ने उसे धुएं तथा धूल से दूर बनाये रखने के लिए सब कुछ किया था, ताकि उसके फेफड़े और उसके वायुमार्ग में सूजन न होने पाए।
हनमंत शिवंकर ने बताया कि सुदेशना के स्कूल के शारीरिक शिक्षा शिक्षक ने उसको एथलेटिक्स मीट में ले जाने के उद्देश्य से मेरी सहमति लेने के लिए बुलाया था। लेकिन मैंने साफ मना कर दिया था। इसके बाद भी शिक्षक और सुदेशना ने खेलों में हिस्सा लेने के लिए अपना पक्का मन बना लिया था।
हनमंत ने हंसते हुए बताया कि जब मुझे किसी तरह उनकी इस यात्रा के बारे में पता चला, तो मैं उन्हें रोकने की उम्मीद में कार्यक्रम स्थल की ओर दौड़ पड़ा। लेकिन, जब तक मैं वहां पहुंचा, तब तक सुदेशना रेस जीत चुकी थी।
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उस पर एथलेटिक्स कोच बलवंत बब्बर की नजर पड़ी थी, जो उस समय तालुका के खेल अधिकारी भी थे। इन सभी वर्षों के बाद, महाराष्ट्र की सुदेशना न केवल केआईवाईजी में सबसे तेज महिला के रूप में उभरी हैं, बल्कि ट्रैक और फील्ड में स्टैंडआउट परफॉर्मर के रूप में भी सामने आईं। सुदेशना ने स्प्रिंट में एक शानदार हैट्रिक पूरी की, जिसमें 100 मीटर, 200 मीटर और 4x100 मीटर का स्वर्ण पदक जीता।