
दुर्ग (वीएनएस)। महिला आयोग अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने आज, सोमवार को दुर्ग में जनसुनवाई की। जनसुनवाई में अंतरजातिय विवाह से संबंधित एक प्रकरण ने अपनी दस्तक दी। प्रकरण में आवेदिक का कथन था कि 2010 में उसके द्वारा अंतरजातिय विवाह किया गया था। जिसके लिए गांव ने उसे व उसके परिवार को समाज से बहिष्कृत के दिया। इसलिए उसने महिला आयोग के समक्ष् निराकरण के लिए अपना आवेदन लगाया है। इसी प्रकरण में महिला आयोग ने दूसरे पक्ष से पूछताछ की। उन्होंने स्वीकार किया कि गांव व समाज के लोगों ने मिलकर पीड़िता, उसके परिवार व उसके ससुराल वालों को समाज से बहिष्कृत किया है। प्रकरण में आगे प्रकाश डालते हुए पीड़िता ने बताया कि उसके ससुर से 7,000 रूपए व 1100 रूपए समाज के सहयोग के नाम पर ली गई है और शादी के 5 वर्षों के बाद समाज में मिलाने के लिए 50 हजार रुपये व 1 लाख रुपये की मांग समाज के द्वारा की जा रही है।
आयोग के द्वारा समझाइश दिए जाने पर अनावेदकगणो ने यह स्वीकार किया गया है कि आवेदिका और उसके परिवार को मिलाने की प्रक्रिया कल, 14 जून को गांव एवं समाज द्वारा की जाएगी। इस अवसर पर आयोग की ओर से अधिवक्ता श्रीमती तुलसी साहू के साथ श्रीमती रामकली यादव, श्रीमती रत्ना नारमदेव व श्रीमती नीलू ठाकुर ग्राम बोडेगाव थाना नंदनी में उपस्थित रहेगें। इस सभा में आवेदिका को अपने पति व परिवार वालों के साथ उपस्थित होने के निर्देश भी दिए गए हैं। आरोपी पक्ष भी अपने गांव व समाज के सभी लोगों को इस बैठक में उपस्थित रखेंगे और गांव समाज के बीच में आवेदिका एवं उसकेे परिवार को सामजिक बहिष्कार को वापस लेने की घोषणा करेंगे। साथ ही साथ आवेदिका पक्ष से ली गई सहयोग राशि 7,000 रुपये व 1,100 रुपये भी वापस किया जाएगा। इस संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान नंदनी थाना के थाना प्रभारी के माध्यम से किसी एसआई या हवलदार को उपस्थित रखने के भी निर्देश आयोग ने दिए है। यदि अनावेदकगण आयोग की निर्णय का उल्लंघन करते है तो अनावेदकगणों के विरुद्ध धारा 384 आईसीपीसी और नागरिक संरक्षण अधिनियम 1905 के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज किये जाने के भी निर्देश दिए हैं साथ ही आयोग को सूचित करने कहा गया। जिससे आयोग द्वारा गठित सदस्यों के रिपोर्ट के आधार पर इस प्रकरण को निराकरण किया जा सकेगा।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उसके बच्चों को अनावेदकगण द्वारा परेशान किया जा रहा है। पति की मृत्यु के बाद आवेदिका अपने पति की पैतृक संपत्ति वाले मकान के एक हिस्से में निवास करती है। यहां अनावेदक द्वारा आवेदिका को यह कहकर परेशान किया जा रहा है कि उसका विवाह असैंवधानिक है और बच्चा भी मृतक पति से नहीं है। ऐसा कहकर उसे घर की सपंत्ति से बेदखल करने अलग-अलग तरीके से परेशान किया जा रहा है। आयोग में सुनवाई के दौरान भी अनावेदक ने कहा है कि आवेदक न ही उनके भाई के पत्नि है न ही बच्चा। आयोग की समझाईश पर अनावेदक और आवेदिका के बीच सुलह कराई गई और अनावेदक को निर्देशित किया गया कि आवेदिका को बिना किसी परेशानी के उसके हिस्से में रहने दिया जाएगा और अनावेदिक उसके बाथरूम का इस्तेमाल नहीं करेगा। अनावेदक अपनी दैनिक दिनचर्या के लिए अपना अलग से बाथरूम बनवाएगा। किसी भी प्रकार की दखल अंदाजी के स्थिति आवेदिका अनावेदक के विरुद्ध पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज करा सकती है। इसी के साथ प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया।
एक और अन्य प्रकरण जिसमें आवेदिका पूर्व में ही अपने पति के नाम पर आवेदन कर चूंकि थी। इसके पश्चात पुनः आवेदिका द्वारा अपने पति व ससुर के अधिवक्ता के खिलाफ केस किया गया है। इस प्रकरण पर आवेदिका का कथन था कि न्यायालय के बाहर अधिवक्ता द्वारा उस पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि वो अपने पति व ससुर पर चल रहे प्रकरण से अपने आप को अलग कर ले। परंतु आयोग द्वारा पाया गया कि आवेदिका के पास थाने या अधिवक्ता संघ में कोई भी लिखित दस्तावेज नहीं है। इसलिए प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया है। आज सुनवाई में 26 प्रकरण थे जिसमें से 4 प्रकरण को निराकृत किया शेष प्रकरण को आगामी सुनवाई में रखा गया है।
आज की सुनवाई में आयोग की अधिवक्ता शमीम रहमान सहित अधिवक्ता श्रीमती तुलसी साहू, श्रीमती रामकली यादव, श्रीमती नीलू ठाकुर, एल्डरमैन रत्ना नारमदेव सहित जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन उपस्थित थे।