
रायपुर/जांजगीर-चाम्पा (वीएनएस)। इंसान अगर चाहे तो चट्टान का भी सीना चीर सकता है। इस कथन को बचाव कर्मियों ने आज साबित कर दिया है। लगभग 100 घंटों तक का अथक प्रयास रंग लाया है। जांजगीर जिले के पिहरीद गांव में बोरवेल के लिए खोदे गए गड्ढे में फंसे राहुल को निकालने में जुटी रेस्क्यू टीम को बड़ी सफलता मिली है। 103 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रेस्क्यू टीम ने राहुल को सकुशल बाहर निकाल लिया है।
जैसे ही रेस्क्यू टीम उस तक पहुंची, तब बाहर में भारतीय सेना और एनडीआरएफ जिंदाबार के नारे लगे। राहुल को तत्काल सेना के जवानों ने घेरकर एंबुलेंस तक पहुंचाया और उसे बिलासपुर अपोलो हॉस्पिटल के लिए रवाना किया। एंबुलेंस में पहले ही मेडिकल टीम तैनात थी, जो जरूरी चिकित्सा देते हुए हॉस्पिटल तक पहुंचेगी। सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट कर राहुल के बाहर आने की जानकारी दी और उसके स्वास्थ्य के लिए कामना की। सीएम ने रेस्क्यू टीम को बधाई दी है। राहुल को देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग जुटे थे। राहुल की पहली झलक मिलने के बाद इनकी संख्या बढ़ गई। इसे देखते हुए प्रशासन को यह अनाउंसमेंट करना पड़ा कि लोग गड्ढे से दूर रहें, जिससे गिरने का खतरा न रहे।
104 घण्टे तक चले दुष्कर ऑपरेशन के बाद राहुल सुरंग से बाहर बोरवेल में फंसे राहुल को अंततः निकाल लिया गया है। स्वास्थ्य परीक्षण के लिए राहुल की ग्रीन कॉरिडोर से बिलासपुर रवानगी कर दी गई है। मुख्यमंत्री श्री @bhupeshbaghel पल-पल की जानकारी ले रहे हैं।#SaveRahulAbhiyaan pic.twitter.com/HLoWgiVxln
— CMO Chhattisgarh (@ChhattisgarhCMO) June 14, 2022
जांजगीर जिले के मालखरौदा ब्लॉक के पिहरिद गांव में 10 साल का राहुल साहू शुक्रवार को करीब चार बजे अपने ही घर के पीछे की बाड़ी में गिरा था। यह सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम और अधिकारी पहुंचे। मामले की गंभीरता को समझते हुए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवान भी रेस्क्यू करने के लिए पहुंचे। बेहद गंभीर परिस्थिति में राहुल को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन शुरू किया गया। राहुल के दिव्यांग होने के कारण कई तरह की चुनौतियां सामने आईं। वह बोल और सुन नहीं सकता। मानसिक स्थिति भी कमजोर है, इसलिए उसे बाल्टी की मदद से बाहर निकालने की कोशिश सफल नहीं हो पाई। शुक्रवार शाम से मंगलवार देर रात तक कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला, एसपी विजय अग्रवाल, एसडीआरएफ के डायरेक्टर मयंक श्रीवास्तव, एनडीआरएफ के जवान, पुलिस, प्रशासन और हेल्थ की टीम डटी रही।
राहुल साहू को बचाने में रेस्क्यू टीम को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी चुनौती डोलोमाइट की चट्टानें थीं। खदानों में इन चट्टानों को ब्लास्ट कर तोड़ा जाता है या हैवी मशीनों के जरिए तोड़ा जाता है। एसईसीएल से मशीनें भी मंगाई गईं। यहां सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि हैवी मशीनों से यदि बोरवेल में मिट्टी धसक जाती तो राहुल को नुकसान होता। इस वजह से मैनुअल तरीके से हैंड ड्रिलिंग की प्रक्रिया की गई। आखिरकार रेस्क्यू टीमों के फौलादी इरादों के आगे चट्टान भी ढह गए और राहुल को बाहर निकाल लिया गया।
चट्टानों का मुकाबला फौलादी इरादों से : भूपेश बघेल
सीएम बघेल इस बीच सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट कर कहा कि मामला संवेदनशील था, इसलिए रेस्क्यू टीम सावधानी से आगे बढ़ रही थी। चट्टानों का मुकाबला हमने अपने फौलादी इरादों से किया और राहुल साहू के सुरक्षित बहार निकलने के लिए सभी को बहुत-बहुत बधाई।
राज्यपाल अनुसुइया उइके ने दी बधाई राहुल साहू के बोरवेल से बाहर निकालने के लिए पूरी टीम को हार्दिक बधाई, देश में चलने वाला ये सबसे बड़ा आपरेशन है। छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले में चल रहा था जिसे पूरे 3 दिन बाद सफल किया गया है। मैं इस रेस्क्यू टीम और जिला कलेक्टर, एसपी और पूरी पुलिस बल को हार्दिक बधाई देती हूं।
बृजमोहन अग्रवाल ने दी रेस्क्यू टीम को बधाई राहुल साहू के बोरवेल से बाहर निकालने के लिए पूरी टीम को हार्दिक बधाई, देश में चलने वाला ये सबसे बड़ा आपरेशन है। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि इस ऑपरेशन राहुल को सफल करने वाले एनडीआरएफ की टीम, एसडीआरएफ की टीम, जिला प्रशासन और कलेक्टर एसपी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने दी बधाई गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने राहुल साहू के बोरवेल से बाहर आने पर पूरी टीम को बधाई दी है।
कॉरिडोर बनाया गया, अपोलो में भर्ती करेंगे राहुल को निकालकर अस्पताल तक ले जाने की पूरी तैयारी हो गई है। राहुल को बाहर लाते ही एंबुलेंस से बिलासपुर लेकर जाएंगे। जहां अपोलो अस्पताल में उसे भर्ती किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राहुल को रेस्क्यू के बाद ग्रीन कॉरिडोर बनाकर ले जाने का काम पूरा हो गया है। अब बस उसके बाहर आने का इंतजार है। इसे लेकर मेडिकल टीम को अलर्ट कर दिया गया है।