रायपुर (वीएनएस)। श्रीराम संगीत महाविद्यालय के समीप बूढ़ापारा निवासी, 63 वर्षीय श्रीमती सरला देवी कटारिया का मंगलवार, 14 जून को समाधिमरण हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थीं। पिछले 15 दिनों से उनकी बेटी पायल पोकरणा उनकी सेवा में लगी हुई थीं। श्रीमती सरला देवी कैंसर की व्याधि से जूझ रहीं थीं, किंतु जैन समाज की धार्मिक रीति का अनुकरण करते हुए वे समाधिस्थ रहीं और पीड़ा की अनुभूति उनसे कोसों दूर थी। मंगलवार, 14 जून की सुबह उन्होंने इस संसार से विदाई ले ली। तब मां की अर्थी को कांधा देकर पायल ने बेटे का फर्ज अदा किया।
अंतिम यात्रा “बैकुंठी' में अर्थी को कांधा दिए बेटी जब घर से लेकर लगातार मुक्तिधाम तक एक घंटे की यात्रा में चलीं, तो मार्ग में समाज-परिवार के वरिष्ठों ने बेटी से आग्रह भी किया वे घर लौट जाएं, मगर उनका मन मां के अंतिम दर्शन के लिए दृढ़ था, वे मुक्तिधाम तक आईं और दाह संस्कार रीति में भी अपनी भागीदारी निभाई।
सामाजिक कार्यकर्ता ओमप्रकाश बरलोटा ने बताया कि आम तौर पर समाजमें अर्थी को कांधा केवल पुरुष ही देते रहे हैं। समाज के लिए ये विरले क्षण थे, जब एक बेटी ने कांधा देकर बेटे का फर्ज निभाया।