नई दिल्ली (वीएनएस)।राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 14 जून, 2022 को बंगलुरू स्थित वसंतपुरा के वैकुंठ पहाड़ी में श्री राजाधिराज गोविंद मंदिर के लोकार्पण कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मंदिर हिन्दू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण प्रतीकों में से रहे हैं। एक स्तर पर वे पवित्र स्थान हैं। वहां उपासक परमात्मा की उपस्थिति महसूस करते हैं, चाहे वह स्पंदनों के रूप में हो या ऊर्जा के रूप में या तीव्र भक्तिपूर्ण भावनाओं के आवेग के रूप में हो। ऐसे स्थान पर आकर कोई भी दुनिया और उसके शोर को पीछे छोड़ सकता है और शांति की अनुभूति कर सकता है। अन्य स्तर पर, मंदिर अक्सर पूजा स्थलों से और आगे के स्थान भी होते हैं। वे कला, वास्तुकला, भाषा तथा ज्ञान परंपराओं के संगम स्थल या पवित्र संगम के बिंदुओं की तरह होते हैं।
गीता के संदेश को विश्व भर में फैलाने वाले दिव्य आत्मा ए. सी. भक्ति वेदांता स्वामी प्रभुपाद के योगदान का उल्लेख करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि कोई व्यक्ति भगवद गीता का उल्लेख करे और इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कंशिएसनेस के संस्थापक-आचार्य दिव्य आत्मा ए सी भक्ति वेदांता स्वामी प्रभुपाद का स्मरण न करे। गीता पर उनकी टिप्पणी ने विश्व भर के साधकों को किसी भी अन्य पुस्तक की तुलना में अर्जुन को दिए गए भगवान कृष्ण के प्रवचनों के रहस्यों को कहीं अधिक रसविभोर किया है।
उनकी इस कृति की लाखों प्रतियां 70 से अधिक भाषाओं में वितरित हो चुकी हैं जिनसे अनगिनत लोगों को शाश्वत संदेश प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि संकट काल में अध्यात्मिक मदद चाहने वालों के लिए श्रीला प्रभुपाद के उपदेशों से ऐसा लगा होगा मानो किसी प्यासे व्यक्ति को बारिश की पहली बूंद की अनुभूति हो गई हो। शहर की सड़कों पर ‘हरे कृष्णा‘ का जाप एक सांस्कृतिक घटना बन गई।