
रायगढ़ (वीएनएस)। औद्योगिक जिले रायगढ़ में पोस्टिंग के लिए बोली लगती है ऐसा कई नेताओं ने बार-बार अपने भाषणों में जिक्र किया है। लेकिन क्या वास्तव में ऐसी स्थिति है?
इन आरोपों को बल तब मिलता है जब कोई अधिकारी घूम-फिरकर वापस यहीं आए और सालों से जमा रहा और चला-चली की बेला आए तो आज जाने की जिद नहीं करने की राग कई तरह से छेड़ देता है। कमोबेश जिले के सभी विभागों में ऐसी ही स्थिति है। कुछ ने तो गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बनाने का दावा भी कर दिया है।
आज बात खास विभाग की जिनसे हमेशा से उम्मीद रहती है कि वही लोगों के सामने नजीर पेश करेंगे लेकिन रायगढ़ के उद्योग,कोयले-कबाड़, जुआ और महुआ ने सारे समीकरण को बिगाड़ डाला, ‘रक्षक ही भक्षक’ यह जुमला सही बैठता है। वो भले ही यहां न हो पर खेल कभी नहीं रूकता, हमेशा जारी रहता है। उनके अपने ही शागिर्द होते हैं बस चेहरे बदलते हैं। रोल वही रहता- ‘जो हुकुम मेरे आका’।
पूरे प्रदेश में पुलिसिया तंत्र में कसावट लाने के लिए 26 अप्रैल को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर ढाई साल से अधिक पोस्टिंग पर रहे राज्य के 318 पुलिसकर्मियों का तबादला डीजीपी अशोक जुनेजा ने किया जिसमें 253 निरीक्षक, 12 उपनिरीक्षक, 7 प्रधान आरक्षक और 31 आरक्षक थे। इस आदेश में तत्काल शब्द का उल्लेख था पर यह तत्काल रायगढ़ पुलिस के लिए दो माह बाद भी नहीं आया। कुछ दिन पहले डीजीपी अशोक जुनेजा ने पुलिस के आलाधिकारियों की बैठक में कहा था 'जिन पुलिसकर्मियों के तबादले को रोकने के लिए उन्होंने मौखिक कहा होगा उन्हें भी तत्काल रिलीव करें।'
ध्यान दें ऐसी स्थिति रायगढ़ जिले में नहीं है फिर भी कुछ पुलिसकर्मी जिले में तबादले के बाद भी रूके हुए हैं। अब ऐसी क्या मजबूरी है या फिर कुछ और जो जिले का मोह नहीं छुड़वा पा रही है। सवाल यह भी है क्या उनके भरोसे ही जिले की पुलिस है। पुलिस अधीक्षक महोदय को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए क्योंकि मसला गंभीर है।