उन्नत जांच तकनीकों के उपयोग में कांस्टेबल से लेकर उच्चस्तरीय पुलिसकर्मियों की क्षमता निर्माण पर ज़ोर

Posted On:- 2022-06-27



नई दिल्ली (वीएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में  न्यायालयिक विज्ञान क्षमताएं: समयबद्ध और वैज्ञानिक जांच के लिए सुदृढ़ीकरण विषय पर गृह मंत्रालय से सम्बद्ध संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक हुई। बैठक में समिति के दोनों सदनों के सदस्य, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, अजय कुमार मिश्रा,  निशिथ प्रामाणिक और केन्द्रीय गृह सचिव सहित गृह मंत्रालय, एनसीआरबी और राष्ट्रीय फॉरेन्सिक विज्ञान विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में देश में उपलब्ध फोरेंसिक विज्ञान क्षमताओं, विशेष रूप से फोरेंसिक जांच पर आपराधिक न्याय प्रणाली की बढ़ती निर्भरता को ध्यान में रखते हुए, की समीक्षा की गई। श्री शाह ने अपराधियों द्वारा प्रौद्योगिकी के उपयोग के मद्देनज़र जांच ऐजेंसियों को उनसे एक कदम आगे रहने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और कहा कि मोदी सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर पुलिस जांच, अभियोजन और फोरेंसिक के क्षेत्र में सुधारों के लिए त्रि-आयामी दृष्टिकोण पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि लक्षित दोषसिद्धि दर हासिल करने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित और साक्ष्य आधारित जांच पर ध्यान देने का ये सही समय है। श्री शाह ने उन्नत जांच तकनीकों के उपयोग में कांस्टेबल से लेकर उच्चस्तरीय पुलिसकर्मियों की क्षमता निर्माण पर ज़ोर दिया। उन्होंने भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम में प्रस्तावित व्यापक संशोधन के माध्यम से प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में एक स्वतंत्र अभियोजन निदेशालय और एक स्वतंत्र फोरेंसिक विज्ञान निदेशालय स्थापित किए जाने की बात कही। श्री शाह ने कहा कि मोदी सरकार 6 साल से अधिक कारावास की सजा वाले अपराधों के सभी मामलों में फोरेंसिक जांच को अनिवार्य बनाने की दिशा में भी काम कर रही है।