राजनांदगांव (वीएनएस)। राष्ट्रसन्त ललितप्रभ सागर और डॉ शांतिप्रिय सागर महाराज साहब को राजनंदगाव में 2 दिन हो गए है। प्रतिदिन उनके प्रवचन में जैन के साथ-साथ अजैन भी बड़ी संख्या उपस्थित हो रहे हैं। प्रवचन में श्रद्धालुओं को जीवन से जुड़ी बातें बताई जाती है । जिसे वे आत्मसात कर एक खुशहाल जीवन जी सकते है।
राजनंदगाव वासी गुरुवर का सानिध्य मिलने से बड़े प्रसन्न है। प्रवचन, धर्मचर्चा आदि में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। गुरुवार ने इन दो दिनों में अपने प्रवचन में श्रद्धालुओं से बड़ी अहम बाते अपने मीठे अंदाज में कहीं। सुनने वाले श्रोतागण भी उनके शब्द भंडार और उदाहरणों से बड़े प्रभवित हुए।
उन्होंने कहा जब हम जीवन मे आते है तो 3 पेज की डायरी अपने साथ लाते हैं। इसका पहला पन्ना हमारे जन्म से पूर्व ही लिखा होता है। कहाँ जन्म होगा, किस वंश ,जाति आदि । इसे हम बदल नही सकते । डायरी के आखरी पन्ने में मृतु की बात लिखी होती हैं। अब बचा मध्य पन्ना, बस यही वो पेज है जो हमारे हाथ में है। जिसे हम या तो इंद्रधनुष की भांति रंगकर खूबसूरत बना सकते है या चाहे तो इसे बदरंग भी बना सकते है । चुनाव हमारा है ।
दूसरी बात जो उन्होंने कही कि स्वर्ग पाने के लिए किसी भी इंसान को मरना ज़रूरी नहीं है, व्यक्ति जीने की कला सीख ले तो यही जिंदगी स्वर्ग बन सकती है। अगर हम क्रोध,कषाय, वैर, विरोध,राग-द्वेष,कलह की भावना लिए जिएंगे तो हमारा जीवन जीते जी नरक बन जायेगा ।
सनसिटी में प्रवचन 30 को आशीष बेद ने बताया कि सुबह 09 से 10:30 तक प्रवचन होता है। जिसमे जैन के साथ अजैन की उपस्थिति भी बड़ी संख्या में रहती है । वे कहते है कि संख्या का अनुमान इससे लगा सकते है कि 'जैन बगीचा' प्रवचन के दौरान पूरा भरा रहता है।
उन्होंने बताया कि गुरुवर का प्रवचन यहां अब 2 दिन और रहेगा उसके पश्च्यात 30 जून को वे पास में स्थित 'सन-सिटी' में प्रवचन फरमाएंगे और दोपहर में ही यहां से दुर्ग की ओर विहार करेंगे।