कलेक्टर ने जिले में उर्वरक व्यवस्था के संबंध में ली बैठक

Posted On:- 2022-06-28



बालोद (वीएनएस)। कलेक्टर महोबे ने कल संयुक्त जिला कार्यालय में आयोजित कृषि, जिला विपणन संघ व सहकारिता विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक में जिले में उर्वरक व्यवस्था के संबंध समीक्षा की और कंपनी एवं राज्य स्तर से उर्वरकों की उपलब्धता की जानकारी ली। बैठक में डबल लॉकस्तर पर उपलब्ध उर्वरकों को यथाशीघ्र समितियों में भण्डारण करके समिति स्तर से कृषकों को वितरण कराने के निर्देश दिये गये। जिन समितियों में उर्वरक की कमी है, उनमें प्राथमिकता के आधार पर उर्वरक भंडारण करने केलिए नोडल अधिकारी, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक को समिति प्रबंधकों के माध्यम से आर.ओ., डी.डी. जारी करने केलिए सख्त निर्देश दिए गए। कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि सामान्यत: कृषकों की ओर से डी.ए.पी. उर्वरकों की मांग अधिक की जा रही है, जिसकी उपलब्धता के लिए जिला एवं राज्य स्तर पर हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। कलेक्टर ने शासन के दिशा निर्देशों के अनुसार उर्वरकों की गुणवत्ता नियंत्रण, विक्रय केलिए पी.ए.ओ.एस. मशीन की अनिवायर्ता एवं निर्धारित दर पर उर्वरकों के विक्रय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि कृषि उत्पादन में हाईयील्डिंग, प्रमाणित व हायब्रिड बीजों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अधिकांश अधिक उपज देने वाली किस्मों की पोषक तत्व ग्रहण करने की क्षमता अधिक होती है। अत: कृषकों की ओर से अधिक उपज प्राप्त करने की दृष्टि से उपयोग के साथ उर्वरकों की खपत में वृद्धि हुई है। मानसून के आगमन 155.90 मि.मि. वर्षा के साथ धान, दलहन एवं अन्य फसलों की फसल की बुआई प्रगति पर है, जिसमें अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए कृषकों द्वारा रसायनिक उर्वरकों की पूर्ति सहकारी व लायसेंसी निजी विक्रेताओं की ओर से की जाती है। उन्होंने बताया कि वतर्मान में पौधों के पोषक तत्वों के पूर्ति केलिए यूरिया, सुपर फास्फेट, डाइअमोनियम फास्फेट (डी.ए.पी.), म्यूरेट आॅफ पोटास, इफको, 12:32:16, एन.पी.के. उर्वरकों की उपलब्धता जिले में हो रही है। उर्वरक औद्योगिक रुप से निर्मित रसायन है, जिसके पोषक तत्वों की उपलब्धता पौधों को शीघ्र होती है। कृषक शीघ्र प्रभाव देने वाली, अधिक पोषक तत्व की मात्रा वाली उर्वरक डी.ए.पी. का उपयोग करना अधिक पसंद करते हैं, क्योंकि इसमें 18 प्रतिशत नाइट्रोजन व 46 प्रतिशत स्फुर (फास्फोरस) है। वतर्मान में शासन की ओर से डी.ए.पी. उर्वरक की कम उपलब्धता को दृष्टिगत रखते हुऐ, पौधों के पोषक तत्व फास्फोरस की पूर्ति केलिए सुपर फास्फेट का उपयोग किया जा सकता है, क्योंकि इसमें 16 प्रतिशत स्फुर (फास्फोरस) व 11 प्रतिशत सल्फर होता है, सल्फर पौधों का महत्वपूर्ण पोषक तत्व है, जो पौधों की वृद्धि व उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है। उन्होंने बताया कि सहकारी व निजी क्षेत्र में उर्वरकों के मूल्य नियंत्रण के लिए उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की कंडिका 3 के अनुसार शासन की ओर से जारी गजट में निर्धारित अधिकतम मूल्य से अधिक कीमत पर कोई भी विक्रेता, निर्माता विक्रय नहीं कर सकता है। सहकारी व निजी लायसेंसी विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों में उर्वरकों का मूल्य एक समान है। अत: कृषकों को उर्वरकों का निर्धारित मूल्य में क्रय करके रसीद प्राप्त करना चाहिए।