बारिश हुई तो पानी सड़कों पर

Posted On:- 2022-06-30



शहर में नगर निगम है, वह बहुत काम करता है। हर साल नाली बनाने, सफाई के लिए करोड़ो रुपए खर्च किए जाते हैं। फिर भी शहर में एक दो घंटे की बारिश हो जाए तो पता चलता है कि निगम के करोड़ो खर्च कर कराए गए काम किसी काम के नहीं है। इससे न तो सड़क पर पानी जमा होना बंद होता है, न ही बारिश के पानी की निकासी जल्दी होती है। परिणाम यह होता है कि शहर के लोगों को जगहृ-जगह एक डेढ़ फीट पानी जमा हो जाने से परेशानी होती है। पानी उतरने में भी एक से एक घंटा से ज्यादा लगता है। इससे कई रास्तों में लोग घंटो फंसे रहते है।राजधानी में बुधवार की शाम मानसून की पहली तेज बारिश एक घंटा से ज्यादा हुई तो सड़कों व गलियों का हाल हर साल की तरह बुरा रहा। सड़क पर जमा व बहते पानी को कोई शहर के बाहर आदमी देखेगा तो यही कहेगा कि इस शहर में नालियां नही है,इसलिए बारिश का पानी सड़़क पर बह रहा है। कचरा सड़क पर फैल गया है। गंदगी पानी के साथ सड़क बह रही है। किसी को यकीन ही नहीं होता है कि इस शहर को सफाई के लिए पुरस्कार मिलता है। स्वच्छता का पुरस्कार देने वाले यदि बारिश क मौसम में रायपुर शहर में घूमें तो रायपुर को शायद ही स्वच्छता का पुरस्कार मिले।। पानी गिरने का मतलब ही होता है कि शहर के लोगों को घंटो परेशान होना है। बड़ी बड़ी कालोनी में रहने वाले से लेकर निचली बस्तियों मेंं रहने वाले सब निगम की लापरवाही की वजह से परेशान रहते हैं।घंटों बारिश होती है तो घंटो कालोौनी व निचली बस्तियों से पानी निकलने में लगता है। पानी जमा होने का मतलब सड़क किनारे की दुकानों में पानी घुसना भी है। बस्तियों की भी यही समस्या होती है।घरों में पानी घुसने पर रहना व खाना पकाना मुश्किल हो जाता है। निगम की टीम को मालूम है कि शहर में बारिश होगी तो कहां कहां किसी वजह से पानी भरेगा लेकिन समय से पहले वह कुछ करती नहीं है। पहले से नालियों की सफाई नहीं करेंगे. पहले से दुकानों का पाटा नहीं तोड़ेंगे। पानी भरने के बाद लोग पानी भरने की शिकायत करेंगे तो निगम की टीम आएगी पाटा तोड़ेगी तब जाकर पानी निकलेगा। आग लगने पर कुआं खोदता है निगम।यही हाल बिजली विभाग का है। पानी गिरने पर ही कई मोहल्लों की बिजली बंद हो जाती है। बुधवार को तेज हवा भी नहीं चली लेकिन बिजली कई इलाकों में बेद हो गई। घंटो बंद रही लोग बिना बिजली के घंटो परेशान रहे। ऐसे में बिजली दफ्तर फोन करो तो कोई उठाता नहीं है। उठा भी लें तो बिजली विभाग की टीम जल्दी नहीं पहुंचती है। यानी निगम की टीम हो या बिजली विभाग की टीम दोनों किसी से कम नहीं है। ये ऐसा काम भी कर सकते हैं कि हर साल होने वाली समस्या न हो। लेकिन ये ऐसा नहीं करत हैं। इनको चुनाव तो लडऩा नहीं है कि समस्या का समाधान नहीं करेंगे तो जनता चुनाव हरा देगी। अगला चुनाव हारेगा तो पार्षद हारेगा। इसलिए हर मौसम में नगर निगम व बिजली विभाग की टीम उतनी परेशान नहीं होती है जितने परेशान पार्षद होते हैं। गर्मी मेें पानी का इंतजाम करते हैं और बारिश में पानी निकासी का इंतजाम करते हैं। यही वजह है कि निगम के पार्षदों की तो कोई कोई तारीफ कर देगा लेकिन निगम के अमले की कोई तारीफ करने वाले नहीं मिलता है।