देश में गुस्सा बढ़ेगा ही

Posted On:- 2022-07-03



देश में जब किसी व्यक्ति की महज इसलिए गलाकाट कर हत्या कर दी जाए कि वह किसी बयान के पक्ष में है तो इससे हर समझदार,सभ्य,लोकतंंत्र में यकीन रखने वाले को गुस्सा आएगा है। इससे देश में गुस्सा बढ़ेगा ही। लोग अपने गुस्से का प्रदर्शन करेंगे ही। लोकतंत्र में किसी को भी शांतिपूर्ण प्रदर्श्रन करने का हक है। इस देश के ज्यादातर लोग समझदार है,वह जानते हैं कि लोकतंत्र में कैसे रहा जाता है, अपने विरोध व गुस्से का कैसे इजहार किया जाता है। नुपूर शर्मा ने गलती की, उसने गलती की माफी मांग ली। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। देश के कानून के हिसाब से उसे सजा मिलेगी। उसके खिलाफ गुस्सा है , विरोध प्रदर्शन करना है तो शांति से विरोध करने का अधिकार है। इस देश में हर तरह की अपराध की सजा देने के लिए कानून है। इसलिए किसी ने कैसा भी अपराध किया हो उसे सजा देने का अधिकारी किसी व्यक्ति को नहीं है। यदि हर व्यक्ति खुद ही जज बन जाए तथा उसके खिलाफ अपराध की खुद ही सजा तय करे,खुद ही सजा दे तो समाज व देश में कैसी अराजकता फैल जाएगी। यही वजह है कि जब उदयपुर में दो लोगों ने खुद ही जज बनकर कन्हैया लाल का गला काट दिया तो किसी ने उनका समर्थन नहीं किया। सभी लोगों ने उनकी बर्बर अमानवीय अपराध की निंदा की है। उसे कड़ी से $कड़ी सजा देने की मांग की है। कन्हैया लाल की हत्या की देश भर में ंिनंदा की है। सत्तारुढ़ से लेकर विपक्ष के नेताओं तक ने इस तरह की हत्या की घोर निंदा की है। देश भर में किए गए बंद का पूरे देश के लोगों ने समर्थन किया है। ऐसा बहुत कम होता है कि कोई राजनीतिक या गैर राजनीतिक दल जब बंद का आव्हान करता है तो बंद को इस तरह का समर्थन मिलता है। ज्यादातर भारत या प्रदेश बंद को जनता का समर्थन नहीं मिलता है। बंद को समर्थन तब मिलता है जब मुद्दे से जनता जुड़ती है। कन्हैयालाल की हत्या का मुद्दा ही ऐसा मुद्दा है कि इससे जनता अपने आप जुड़ गई। इस तरह की हत्या का समर्थन कोई नहीं कर सकता। इस तरह की हत्या का समर्थन करने का मतलब है कि देश में कानून नाम की कोई चीज ही नहीं है,जब किसी को किसी बात पर गुस्सा आ गया तो किसी का भी गला रेत दे। देश व अदालत को अब हत्या व आतंकवादी हत्या में फर्क करना ही होगा तथा उसकी सजा में भी फर्क होना चाहिऐ आतंकवादी हत्या का मकसद पूरे समाज व देश को डराना होता है। इसलिए इस तरह की हत्या कोई भी करे उसे इतनी कड़ी सजा मिलनी चाहिए कि लोग ऐसी हत्या करते हुए डरें। चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार यदि कोई किसी भी वजह से किसी को जान से मारने की धमकी देता है तो उस धमकी को गंभीरता से लेने की जरूरत है ताकि किसी को किसी का गला काटने का मौका ही न मिले। भिलाई व कुम्हारी में भी दो लोगों ने ऐसी धमकी दी थी छत्तीसढ़ पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर सराहनीय काम किया है। हर राज्य की पुलिस इसी तरह जान से मारने की धमकी देने पर त्वरित कार्रवाई करे तो उदयपुर जैसी घटनाएं कहीं न हो। कम से कम कोई खुले आम धमकी देकर किसी की बर्बर हत्या तो नहीं कर सकेगा। उदयपुर व अमरावती में हुई हत्या वैसे ही लोग करते हैं जिनका ब्रेन वाश कर यही समझाया गया होता है कि वह कोई महान काम अपने धर्म,समाज के लिए कर रहे हैं। यह उस समाज की जिम्मेदारी है जहां युवाओं का इस तरह ब्रेन वाश किया जाता है,उन लोगों तथा संस्थाओं की पहचान करे। उनकी निंदा करे तथा ब्रेन वाश को बंद कराए। महज बर्बर हत्या की निंदा करने से इस तरह की हत्याएं नहीं रुकने वाली हैं। बच्चों का युवाओं का ब्रेनवाश होता रहेगा तो इस तरह की हत्याओं का सिलसिला चलता रहेगा।