सहकारिता का विस्तार पवित्र भावना से संभव : मोहम्मद अकबर

Posted On:- 2022-07-04



रायपुर (वीएनएस)।  छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ और अन्य सहकारी संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस भव्यता के साथ मनाया गया। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर सहकारिता से विश्व का बेहतर निर्माण विषय पर संगोष्ठी का आयोजन जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्या. रायपुर के सभागार में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन मंत्री मोहम्मद अकबर थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रायपुर ग्रामीण विधायक व शाषी परिषद सदस्य भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ नई दिल्ली सत्यनारायण शर्मा ने की। छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेन्द्र शर्मा अति विशिष्ट अतिथि रहे। संगोष्ठी की शुरुआत छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष झुनमुन गुप्ता के सहकारी संदेश वाचन के साथ हुई। वन मंत्री श्री अकबर ने कहा कि सहकारिता में जागरूकता की आवश्यकता है, सहकारिता में और अधिक विस्तार की जरूरत है और यह सहकारिता में पवित्र भावना से कार्य करने पर ही संभव है। वर्तमान समय में सहकारिता का विस्तार हुआ है, क्योंकि भूपेश बघेल की सरकार आने के बाद इसका विस्तार किया गया और अब सहकारी समितियों के माध्यम से 98 लाख मे. टन धान खरीदी की जा रही है। धान खरीदी में सहकारी समितियों का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होने कहा कि पहले मध्यप्रदेश के समय में यहां शक्कर कारखाना नहीं था। अजित जोगी शासनकाल में सहकारिता के क्षेत्र में पहले शक्कर कारखाना की स्थापना की गई, जिसे मैंने कवर्धा के भोरमदेव के नाम से शक्कर कारखाना का नाम रखने के लिए निवेदन किया। अजीत जोगी ने 11 महिने के कार्यकाल में इसकी स्थापना की। श्री अकबर ने कहा कि लघु वनोपज संघ में सहकारिता के माध्यम से 1 हजार करोड़ तेन्दूपत्ता तुड़ाई का वितरण किया गया है। पूरे भारत में छत्तीसगढ़ राज्य में ही 73 प्रतिशत लघु वनोपजों की खरीदी की जाती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे रायपुर ग्रामीण क्षेत्र के विधायक सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि सहकारिता से विश्व का बेहतर निर्माण का थीम बहुत ही सुंदर है। मजबूत विश्व का निर्माण करने की दिशा में सहकारिता ही एकमात्र विकल्प है। उन्होने कहा कि यहां उपस्थित सभी नेता सहकारिता से जुड़े है। सहकारिता के संकट के समय में श्री अकबर ने सहायता प्रदान की, जिसके कारण ही सहकारिता को संबल मिला है। अब प्रदेश सरकार को किसानों की आय के श्रोत बढ़ाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए, ताकि किसान समृद्ध एवं सबल हो सके। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि सहकारिता में नई सोच विकसित करने की आवश्यकता है। समिति के पदाधिकारियों और अधिकारियों को एक साथ मिलकर काम करना चाहिए, ताकि सहकारिता को मजबूती मिले और सहकारी आंदोलन आगे बढ़े। श्री शर्मा ने संगोष्ठी में मौजूद सभी सहकारी बंधुओं से कहा कि आगामी माह में राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जायेगा। जिसमें सभी सहकारीजन अपने विचारों को सबके समक्ष रखेंगे। कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि सहकारिता का मूल मंत्र एक साथ मिलजुल कर काम करना और एक दूसरे की कमियों को दूर करना ही है। नदी, नालों, पेड़ों की रक्षा मिलकर करने से ही बेहतर विश्व का निर्माण किया जा सकता है। सभी समितियों के समक्ष कई चुनौतियां होती हैं और समितियां इन्हीं चुनौतियों का सामना कर आगे बढ़ रही हैं। वर्तमान समय में देश को मानवीय मूल्यों की दिशा में जोडऩे की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि सहकारी समितियों का उददेश्य लाभ कमाना नहीं बल्कि मनुष्यता की रक्षा करना है। राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष झुनमुन गुप्ता ने कहा- इस वर्ष भी विश्व की अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में, सहकारी समितियों ने खुद को कारगार साबित किया है। सहकारिता आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देता है, पर्यावरणीय गिरावट और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ती हैं, अच्छी नौकरियां पैदा करती हैं, खाद्य सुरक्षा में योगदान देती हैं, स्थानीय समुदायों के भीतर वित्तीय पूंजी रखते हैं, नैतिक मूल्य श्रृंखला बनाते हैं, और लोगों की भौतिक स्थितियों और सुरक्षा में सुधार करके सकारात्मक शांति में योगदान करते हैं। उन्होने कहा कि इस उत्सव का उद्देश्य सहकारिता के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना और राष्ट्र के पूरक लक्ष्यों, उद्देश्यों के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहकारी आंदोलन को प्रकाश में लाना है। वैश्विक स्तर पर सहकारी अर्थव्यवस्था एक अरब से अधिक सदस्यों को एकीकृत करती है और दुनिया की 10 प्रतिशत आबादी के लिए रोजगार पैदा करती है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ के उपाध्यक्ष रविन्द्र सिंह भाटिया ने कहा कि, शासन की गोधन न्याय योजना का कार्य सहकारिता की भावना के साथ किया जा रहा है, जिससे हजारों लोग लाभान्वित हो रहे हैं और रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ इस तरह के आयोजन करता रहेगा जिससे प्रदेश में सहकारी आन्दोलन को गति मिले।