सत्य को जानने के लिए सम्यक दृष्टि आवश्यक : आचार्य विशुद्ध सागर

Posted On:- 2022-07-04



कबीरधाम (वीएनएस)। आचार्य विशुद्ध सागर महाराज का रायपुर वर्षावास में जाते समय धर्म नगरी कवर्धा मे सोमवार 4 जुलाई को प्रातः 8:00 बजे प्रवेश हुआ। आचार्य संघ अगवानी के लिए समस्त जैन समाज एवं अन्य समाज के पदाधिकारी राजमहल चौक में उपस्थित थे। सभी ने आचार्य की जय घोष के साथ उल्लास पूर्वक आगवानी की। भला ऐसे समय में भगवान इंद्र भी कैसे पीछे रहते ,वे भी आचार्य की अगवानी में जमकर बरसे। जय घोषों के बीच आचार्य श्री का आगमन महावीर स्वामी चौक स्थित थाना भवन में हुआ। ज्ञातव्य है कि कवर्धा विधायक व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर के प्रयासों से आचार्य विशुद्ध सागर के छत्तीसगढ़ संपूर्ण प्रवास के लिए उन्हें राज्य अतिथि का दर्जा दिया गया है।

सर्वप्रथम आचार्य का पाद प्रक्षालन किया गया, मंगलाचरण श्रीमती किरण नाहटा एवं श्रमण परिवार द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। जैन संघ के अध्यक्ष राजेंद्र बोथरा, मूर्तिपूजक संघ के अध्यक्ष, जैन संघ के अध्यक्ष, दिगंबर जैन संघ के अध्यक्ष, जैन विहार सेवादल, जैन संघ छुई खदान एवं आचार्य विशुद्ध सागर बिहार समिति रायपुर द्वारा आचार्य को श्रीफल भेंट कर भेंट कर नमन किया गया। विहार पूर्णियारजक परिवार के सुधीर कुमार, रितेश कुमार, अरिहंत कुमार बाकलीवाल एवं परिवार का सम्मान जैन संघ कवर्धा की ओर से संघ के अध्यक्ष राजेंद्र बोथरा, प्रेमचंद श्रीश्रीमाल, प्रकाश बोथरा द्वारा किया गया।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए संघ के मंत्री गेन्दमल मोदी ने कहा 22 वर्षों के पश्चात सन 22 में ही 22 मुनियों का संघ कवर्धा में पदार्पण स्थानीय समस्त जैन समाज के लिए गौरव एवं अति हर्ष की बात है।

आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि अलग-अलग रंगों के चश्मे से वस्तु उसे रंग की दिखलाई देती है। सत्य को जानने के लिए सम्यक दृष्टि रुपए सफेद चश्मा लगाना होगा। सबसे बड़ी तपस्या अपने को छोटा मानना है जो यह कहे कि मैं सब जानता हूं वह नादान है। उबलते हुए पानी मैं चेहरा नहीं दिखलाई देता। पानी को उबालना बंद करे, अर्थात दिमाग को ठंडा रख कर ही हम सत्य जान सकते हैं पहचान सकते हैं। पानी से गीले होने पर बीमार हो सकते हैं, किंतु जिनवाणी से भीगने पर सत्य को जानेंगे एवं बीमारी दूर हो सकती है। आत्मा का स्वभाव धर्म है परंतु इसके विपरीत अधर्म के लिए हमें विशेष प्रयास करना होता है। मनुष्य को स्व स्वभाव में रहकर सत्य को जाना चाहिए एवं अपना कल्याण करना चाहिए।

कार्यक्रम को सफल बनाने में रुपेश सिंघाई, विकास सेठिया, दीपक जैन, अभय लोढा, अनिल प्रशांत मोदी, चक्रेश जैन, अमन जैन, विहार सेवा दल के सभी सदस्यों ने पूर्ण निष्ठा एवं लगन से कार्य किया एवं आयोजन को सफल बनाया।