किसी भी देश समाज में सजा या जुर्माने की व्यवस्था की ही इसलिए जाती है कि लोग वह काम करते हुए डरें जिसके कारण सजा या जुर्माना हो सकता है। जब तक डर पैदा नहीं किया जाता है तो आदमी डरता नहीं है। वह गलत काम करता चला जाता है। जब उसे सजा मिलती है या ज्यादा जुर्माना देना पड़ता है तो उसे पता चलता है कि यह काम करने पर उसे आर्थिक हानि नहीं ज्यादा आर्थिक हानि हो रही है तो वह आर्थिक हानि से बचने के लिए सजग रहता है। एक बार दस हजार रुपए जुर्माना देने पर बहुत कम लोग शराब पीकर वाहन चलाना पसंद करेंगे। एक बार शराब पीकर वाहन चलाने पर पुलिस दस हजार रुपए जुार्माना करती है, मामला बनाकर कोर्ट भेज देती है तो आदमी को कोर्ट ेमें दस हजार रुपए जुर्माना देना ही पड़ेगा। सरकार ने यह अच्छा काम किया है कि शराब पीकर वाहन चलाने पर जुर्माना दस हजार रुपए कर दिया है। पहले जुर्माना कम था तो लोग आसानी से जुर्माना पटा कर फिर शराब पीकर वाहन चलाना शुरू कर देते थे।कम जुर्माना के कारण शराब पीकर वाहन चलाना नहीं रुक रहा था। लोग शराब पीकर रोज वाहन चलाते थे और खुद मरते थे या दूसरों को मारते थे,घायल होते थे, जिंदगी भर के लिए विकलांग होते थे।इससे राज्य,देश व समाज को होने वाली जनहानि रुक नहीं रही थी। सरकार सख्त यातायात कानन बनाती है, कानून का उल्लंघन कर जुर्माने की रकम बढ़ाती है तो बहुत से लोग इसका विरोध करते हैं कि यह ठीक नहीं है।आदमी इतना ज्यादा पैसा कैसे देगा। वह यह नहीं सोचते हैं कि सरकार जुर्माना ज्यादा वसूल कर अपनी आय नहीं बढ़ाना चाहती है, वह तो चाहती है कि लोग शराब पीकर वाहन न चलाए ताकि परिवार व समाज को जो जनहानि होती है, वह जनहानि न हो। किसी परिवार का मुखिया हादसे में मारा जाता है तो परिवार को जिंदगी भर तकलीफ होती है, किसी के घर का इकलौता बेटा मर जाए तो माता पिता को जिंदगी भर दुख रहता है। हादसे में जो विकलांग हो जाते हैं वे जिंदगी भर के लिए अपाहिज हो जाते हैं, दूसरों परआश्रित हो जाते हैं। असहाय हो जाते हैं।ज्यादा जुर्मानो का मकसद है हादसों को रोकना। ज्यादा हादसे तब ही होते हैं।जब आदमी शराब पीकर वाहन चलाता है।नशे में आदमी लापरवाह हो जाता है वह अपनी और किसी की परवाह नहीं करता है।उसे जब शराब पीकर वाहन चलाने पर दस हजार रुपए का जुर्माना देना पड़ता है तो वह सोचता है कि कुछ सौ रुपए की शराब पीकर वाहन चलाने से तो उसे दस हजार रुपए का नुकसान होता है। ऐसी स्थिति में वह या तो शराब नहीं पीएगा. यह अच्छी बात है, यदि शराब पीता है तो वह वाहन नहीं चलाएगा।यह भी अच्छी बात है क्योंकि इससे वह खुद हादसे में घायल नहीं होगा, किसी दूसरे को घायल नहीं करेगा। न वह खुद हादसे में मरेगा न ही किसी दूसरे को मारेगा। इसलिए जरूरी है कि पुलिस व यातायात पुलिस शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ सिर्फ शनिवार नहीं और किसी दिन भी अभियान चलाना चाहिए। क्योंकि एक दिन अभियान चलाने से ऐसा भी हो सकता है कि लोग एक दिन शराब पीकर वाहन न चलाएं बाकी दिन शराब पीकर वाहन चलाएं।पुलिस को किसी भी दिन अचानक शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए। इससे शराब पीकर वाहन चलाने वाले लोग रोज सजग रहेंगे कि पुलिस तो किसी भी दिन चेक कर सकती है।इसलिए वह शराबपीकर वाहन चलाना ही छोड़ दें। पुलिस विभाग में सबसे ज्यादा भ्र्ष्टाचार होता है। इसलिए होसकता है कि पुलिस इस अभियान को अपनी कमाई का जरिया बना ले।इसके लिए आलाअफसरों को सजग रहना होगा ताकि जनहित में चलाया जाने वाला अभियान भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़ जाए।