रायपुर (वीएनएस)। ऋषभ कॉलोनी ग्राउंड दुर्ग की धर्मसभा में रायपुर श्रीसंघ से श्रीऋषभदेव जैन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया (कन्नू भैया) सम्मिलित हुए. उन्होंने बताया कि राष्ट्रसंत श्रीललितप्रभ सागरजी महाराज साहब के जीवन जीने की कला पर आधारित प्रवचन का श्रवण करने विविध धर्मों के अनुयायी हजारों की संख्या में एकत्र थे. इस दुर्लभ प्रसंग पर राष्ट्रसंत श्रीललितप्रभ महाराजजी ने जीवन को संस्कारी बनाने पर ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि जो माता-पिता बच्चों को केवल जन्म देते हैं, वे सामान्य हैं।
जो बच्चों को जन्म के साथ सुविधा-संपत्ति देते हैं, वे मध्यम हैं, पर जो अपने बच्चों को जन्म और सम्पत्ति के साथ अच्छे संस्कार भी देते हैं, वही उत्तम माता-पिता कहलाते हैं। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि वे अपने बच्चों को इतना सुयोग्य बनाएं कि वे समाज की अग्रिम पंक्ति में बैठने लायक बन सकें और समाज में उनकी चर्चा हो। बच्चों को पढ़ा-लिखाकर केवल शिक्षित ही न बनाएं, बल्कि संस्कारित भी बनाएं। संतप्रवर ने कहा कि अच्छे संस्कार दुनिया के किसी मॉल में नहीं मिलते, ये तो घर के अच्छे माहौल में मिलते हैं। हमें इतना उत्तम जीवन जीना चाहिए कि हमारा जीवन ही बच्चों के लिए आदर्श बन जाए।
कई लोगों ने किया नशे का त्याग जब संतश्री ने झोली फैलाकर सत्संग प्रेमियों से नशे का त्याग करने की गुरुदक्षिणा मांगी तो कई युवाओं व लोगों ने आजीवन नशे के त्याग का संकल्प लिया और सभी भाई-बहनों ने हाथ खड़े कर नशे से सदा दूर रहने का मानस मनाया। संतश्री ने कहा कि नशा दांत से आंत तक केवल नुकसान ही करता है। जहां एक अच्छी आदत जीवन को ऊंचाइयां देती है, वहीं एक बुरी आदत अच्छी जिंदगी को बर्बाद कर देती है। आपका एक गलत शौक पूरे परिवार को शोक में डाल सकता है। व्यक्ति भूल-चूककर नशा करने की आदत जीवन में न डाले, क्योंकि नशा नाश की निशानी है। नशा दांत से लेकर आंत तक, दिल से लेकर दिमाग तक नुकसान ही करता है। अगर इन्हें जीते-जी छोड़ देंगे तो हम जीत जाएंगे, नहीं तो ये एक दिन मौत बनकर हमें छोड़ देंगे।
राष्ट्रसंत आज भिलाई-3 में, 8 को कैवल्यधाम पधारेंगे दिव्य चातुर्मास समिति के महासचिव द्वय पारस पारख, प्रशांत तालेड़ा व कोषाध्यक्ष अमित मूणोत ने बताया कि इंडोर स्टेडियम परिसर रायपुर में राष्ट्रसंत का 10 जुलाई से प्रवचन होना है। राष्ट्रसंत ललितप्रभ सागरजी एवं डॉ. शांतिप्रिय सागर जी महाराज साहब ने बुधवार को दुर्ग से वैशाली नगर भिलाई की ओर पग विहार किया. 7 जुलाई को भिलाई-3 में एक दिवसीय प्रवचन और रात्रि विश्राम के पश्चात वे 8 जुलाई को कुम्हारी स्थित कैवल्य धाम में पधारेंगे । इसके बाद उनका पद विहार रायपुर जैन दादाबाड़ी के लिए होगा। 10 जुलाई को शहर में उनका भव्य प्रवेश आयोजित है।