सतनामी समाज में कफन और मृत्यु भोज पर प्रतिबंध, सामाजिक सुधार के 15 प्रस्ताव पारित

Posted On:- 2026-05-02




रायपुर (वीएनएस)। राजधानी रायपुर में आयोजित एकदिवसीय सतनामी सामाजिक सम्मेलन में समाज सुधार को लेकर ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में कफन प्रथा और मृत्यु भोज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने सहित 15 महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। साथ ही गुरु घासीदास जयंती हर वर्ष 18 दिसंबर को ही मनाने का निर्णय भी लिया गया।

विमतरा सभा हाल में आयोजित इस सम्मेलन की शुरुआत बाबा गुरु घासीदास के छायाचित्र पर पूजा-अर्चना के साथ हुई। कार्यक्रम में प्रदेशभर से समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, प्रबुद्धजन और विभिन्न जिलों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए। आगंतुकों का तिलक-चंदन से स्वागत किया गया।

प्रदेश अध्यक्ष एल.एल. कोसले ने समाज में एकीकरण, समन्वय और सामाजिक रीति-रिवाजों में समयानुकूल सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए 15 बिंदुओं का प्रस्ताव रखा। इन प्रस्तावों में जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कारों में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने, सामाजिक कार्यक्रमों में सादगी लाने और एकजुटता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि मृत्यु के अवसर पर कफन केवल परिवारजन ही देंगे, जबकि अन्य लोगों द्वारा कफन देने की परंपरा पर रोक रहेगी। इसी तरह मृत्यु भोज पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा, हालांकि सामर्थ्य अनुसार सादा भोजन कराया जा सकेगा। इसके अलावा सामाजिक कार्यक्रमों में नशापान और तामसिक भोजन पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया।

गुरु घासीदास जयंती 18 दिसंबर को ही मनाने, सामाजिक कार्यक्रमों में पारंपरिक भजन-कीर्तन को बढ़ावा देने तथा फिजूल खर्ची पर रोक लगाने पर भी सहमति बनी। विवाह और सगाई में सीमित संख्या में लोगों की उपस्थिति, आदर्श विवाह को प्रोत्साहन और सामाजिक विवादों का समाधान समाज स्तर पर करने जैसे निर्णय भी लिए गए।

सम्मेलन में मंत्री दयाल दास बघेल, पूर्व मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, उपाध्यक्ष डोमनलाल कोर्सेवाडा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने समाज की एकता, शिक्षा और स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि आत्मनिर्भर और शिक्षित समाज ही मजबूत समाज का निर्माण कर सकता है।

कार्यक्रम में समाज के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, साहित्यकारों, कलाकारों और युवाओं ने भी अपने विचार रखे। सभी ने एकजुट होकर समाज के विकास और कुरीतियों के उन्मूलन के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

सम्मेलन में पारित प्रस्तावों को जल्द ही समाज में लागू करने की बात कही गई, ताकि सामाजिक सुधार के साथ एक सशक्त और संगठित समाज का निर्माण किया जा सके।



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