ऩई दिल्ली(वीएनएस)।रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए जारी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों के बीच यूक्रेन के पड़ोसी और रूस के साथ टकरावपूर्ण संबंधों के लिए पहचाने जाने वाले पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों देशों ने व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और रक्षा समेत कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। खास तौर पर रक्षा उद्योग में साझेदारी, संयुक्त अनुसंधान और सह-उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने के फैसले ने इस यात्रा को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है। इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि पोलैंड के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग रूस के साथ भारत के दशकों पुराने और मजबूत रक्षा संबंधों को किस हद तक प्रभावित करेगा? भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को कायम रखते हुए इन दोनों देशों के साथ रिश्तों का संतुलन कैसे साधेगा? नीतियांदेखें
हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की आज हुई व्यापक बातचीत ने भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश की है। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य तय करने के साथ रक्षा उद्योग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), अंतरिक्ष, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। हम आपको याद दिला दें कि अगस्त 2024 में मोदी की पोलैंड यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था और 2024-2028 की संयुक्त कार्ययोजना अपनाई गई थी। टस्क की 21 से 23 अक्टूबर तक की भारत यात्रा इसी साझेदारी की मध्यावधि समीक्षा के बाद आगे की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। साथ ही पोलैंड के प्रधानमंत्री के साथ करीब 100 प्रमुख कारोबारी प्रतिनिधियों का आना बताता है कि वारसॉ भारत को केवल राजनीतिक सहयोगी नहीं, बल्कि निवेश, उत्पादन और तकनीकी साझेदारी के बड़े बाजार के रूप में देख रहा है।
रक्षा सहयोग बढ़ेगा, लेकिन ठोस सौदे का इंतजार
हम आपको बता दें कि रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों ने नियमित संस्थागत संवाद जारी रखने और रक्षा उद्योगों के बीच व्यावसायिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसके लिए डिफेंस इंडस्ट्री डायलॉग स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत कंपनियों के बीच संपर्क बढ़ाने तथा पारस्परिक सहमति से तकनीकी सहयोग, संयुक्त अनुसंधान, सह-विकास और सह-उत्पादन की संभावनाएं तलाशने की योजना है।
साथ ही पोलैंड के वित्त मंत्री आंद्रेज दोमान्स्की ने यात्रा से पहले भारतीय कंपनियों के साथ रक्षा अनुसंधान एवं विकास में साझेदारी की इच्छा जताई थी। उनका कहना था कि पोलैंड भारतीय बाजार को रक्षा उपकरणों की आपूर्ति करने के साथ तकनीकी सहयोग भी बढ़ाना चाहता है। लेकिन फिलहाल संयुक्त घोषणा में किसी खास हथियार प्रणाली, सैन्य उपकरण, तकनीक हस्तांतरण या भारत में रक्षा उत्पादन संयंत्र स्थापित करने का विवरण नहीं दिया गया है। लिहाजा, रक्षा सहयोग का ढांचा तैयार करने की दिशा में कदम तो बढ़ा है, लेकिन उसे ठोस सौदों में बदलना अभी बाकी है। इसके अलावा, संवेदनशील रक्षा सूचनाओं की सुरक्षा के लिए दोनों पक्षों ने वर्गीकृत सूचनाओं के पारस्परिक संरक्षण और आदान-प्रदान संबंधी समझौते पर जल्द हस्ताक्षर होने की उम्मीद जताई है। देसीउत्पाद खोजें
व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य, 10 अरब डॉलर की ओर नजर
आर्थिक मोर्चे पर देखें तो सबसे ठोस घोषणा 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने की है। दोनों देशों के बीच 2025 में व्यापार करीब 6.36 अरब डॉलर रहा था। ऐसे में 10 अरब डॉलर का आंकड़ा पार करना भी महत्वाकांक्षी लक्ष्य है, हालांकि संयुक्त बयान में इसके लिए अलग से कोई वार्षिक लक्ष्य या क्षेत्रवार निवेश समयसीमा घोषित नहीं की गई है। भारत-पोलैंड संबंधों में यह लक्ष्य कारोबार को नई ऊंचाई देने की राजनीतिक प्रतिबद्धता जरूर दर्शाता है।
साथ ही मोदी ने पोलिश कंपनियों को भारत में निवेश और परिचालन विस्तार का न्योता दिया। औद्योगिक मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा, बुनियादी ढांचे, खनन, ऊर्जा और सूचना प्रौद्योगिकी को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रखा गया है। भारत से मशीनरी, रसायन, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। पोलैंड भारतीय कंपनियों के लिए मध्य और पूर्वी यूरोप के बाजारों तक पहुंच बनाने का प्रवेश द्वार बनना चाहता है। साथ ही भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के जल्द हस्ताक्षर, अनुमोदन और क्रियान्वयन पर भी दोनों नेताओं ने जोर दिया।
परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और एआई पर नजर
इसके अलावा, दोनों देशों ने रक्षा के साथ अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा में संबंध प्रगाढ़ करने पर सहमति जताई है। सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और एआई में संयुक्त अनुसंधान तथा स्टार्टअप साझेदारी बढ़ाने की योजना है। भारत-पोलैंड स्टार्टअप ब्रिज और युवाओं के लिए तकनीकी हैकाथॉन की पहल भी सहयोग को व्यावहारिक स्वरूप दे सकती है। हम आपको यह भी बता दें कि पोलैंड बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्रों और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) पर काम कर रहा है। उसके अंतरिक्ष उद्योग में सैटेलाइट और पृथ्वी निगरानी तकनीक की विशेषज्ञता भी है। साथ ही दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों, बैटरी पुनर्चक्रण और दुर्लभ मृदा तत्वों के प्रसंस्करण में सहयोग की संभावनाएं भी सामने आई हैं।
आतंकवाद पर साझा रुख, यूक्रेन पर शांति की अपील
इसके अलावा, वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों ने आतंकवाद की सभी रूपों में निंदा की और पहलगाम हमले का उल्लेख करते हुए आतंकवादी नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों और वित्तपोषण के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की। दोनों देश आतंकवाद-रोधी संवाद शुरू करेंगे। पोलैंड ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन के साथ 2028-29 के लिए अस्थायी सदस्यता की भारतीय उम्मीदवारी का भी समर्थन किया। साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध पर दोनों नेताओं ने व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी शांति की जरूरत बताई। संयुक्त बयान में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा, पोलैंड ने आपदा-रोधी बुनियादी ढांचा गठबंधन (सीडीआरआई) में शामिल होने की घोषणा की है। वहीं, दोनों देशों ने प्रत्यक्ष उड़ानों, बंदरगाह सहयोग, समुद्री सुरक्षा, शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाने पर भी जोर दिया।
कुल मिलाकर देखें तो डोनाल्ड टस्क की भारत यात्रा ने व्यापार दोगुना करने के लक्ष्य, रक्षा उद्योग में साझेदारी और आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति जैसे अहम फैसलों के जरिए भारत-पोलैंड संबंधों को नई मजबूती दी है। इस पूरी कवायद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक सफलता भी रेखांकित होती है, जो रूस के साथ भारत के पारंपरिक रिश्तों को बनाए रखते हुए यूरोप के एक महत्वपूर्ण देश के साथ रणनीतिक सहयोग का दायरा बढ़ा रहे हैं। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत का यही संतुलित दृष्टिकोण उसकी कूटनीतिक स्वायत्तता और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को दर्शाता है। अब देखना यह है कि 2024-2028 की संयुक्त कार्ययोजना के शेष समय में दोनों देश इन सहमतियों को कितनी तेजी से निवेश, अत्याधुनिक तकनीक, रोजगार और ठोस व्यापारिक उपलब्धियों में बदल पाते हैं।
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