तरपोंगी टोलप्लाजा में सरेआम चल रही दुगनी उगाही, कर्मचारी कर रहे बदतमीजी

Posted On:- 2022-07-10



रायपुर (वीएनएस)। गाड़ियों में फ़ास्ट टैग अनिवार्य होने के बाद से जहां एक ओर लोगों को लंबी लाइन और जाम से छुटकारा मिला है, वहीं इसे लेकर धांधली भी जमकर चल रही है। कई बार वॉलेट में बैलेंस रहने के बावजूद भी लोगों को दिक्कत आती है, और लंबी बहस, तूतू-मैंमैं के बाद उन्हें दुगना टोल भुगतान करना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां वॉलेट में बैलेंस रहने के बाद भी रायपुर के एक वरिष्ठ पत्रकार को दुगना टोल भरना पड़ा।

यह मामला रायपुर-बिलासपुर हाईवे पर स्थित तरपोंगी टोलप्लाजा का है, जहां कर्मचारियों की मिलीभगत से लोगों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार आशीष तिवारी रविवार को अपने परिवार के साथ बिलासपुर से लौट रहे थे, इस दौरान जब वे तरपोंगी टोल प्लाजा से जब वे गुजरे तो स्कैनर ने उनके वाहन पर लगे फ़ास्ट टैग को स्कैन नहीं किया। जब उन्होंने कर्मचारी को बताया कि उनके वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस है, तो वह उनके साथ बदतमीजी करने लगा और कहा कि उन्हें दुगना टोल जमा करना पड़ेगा। इस दौरान टोल प्लाजा के अन्य कर्मचारी भी आ गए और उन्हें धमकाने लगे। इसके बाद उन्होंने दुगना टोल भुगतान कर अपनी गाड़ी आगे बढ़ाई, लेकिन जैसे ही उन्होंने प्लाजा को पार किया, उनके फोन में टोल भुगतान का मैसेज आया। उनके वॉलेट से 85 रुपए डेबिट हो चुके थे। उन्होंने फिर अपनी गाड़ी वापस घुमाई और कर्मचारी को इस धांधली के बारे में बताया। कर्मचारी ने पहले तो किसी धांधली से इंकार कर दिया, लेकिन जब उसे लगा कि चोरी पकड़ी गई है, तो उसने पैसे वापस कर दिए। दरअसल कर्मचारी स्कैनर के ऊपर पानी या ऐसा कुछ छिड़क देते है, जिससे टैग स्कैन नहीं होता है, और दुगना टोल का भुगतान करना पड़ता है, जो सीधे इस कर्मचारियों की जेब में जाता है। इस तरह ये कर्मचारी लोगों की जेब पर डाका तो डाल ही रहे है, शासन को भी राजस्व का चूना लगा रहे हैं। जानकारी प्राप्त हुई है कि इस टोल प्लाजा के ठेकेदार का नाम अमरनाथ त्यागी है और यहां के सभी कर्मचारी मूलतः बिहारी है, जिसके चलते उन्हें किसी की परवाह नहीं रहती है, और लोगों से दुर्व्यवहार करते रहते हैं।