राजनीति में कुछ भी हो सकता है

Posted On:- 2022-07-11



क्रिकेट की तरह राजनीति में भी घोर अनिश्चितता है,कह सकते हैं कि कभी भी कुछ भी हो सकता है। मजबूत सरकार कमजोर हो सकती है। कमजोर सरकार गिर सकती है। पार्टी व संगठन में असंतोष दीमक की तरह होता है। वह पार्टी व संगठन को कितना कमजोर कर चुका है,इसका पता न तो सीएम को चलता है, न ही पार्टी अध्यक्ष को। जब पता चलता है तब तक सब कुछ समाप्त हो चुका होता है। पार्टी में ्असंतोष है,नाराजगी है तो नेतृत्व को उसका पता रहना चाहिए। पता रहने पर उसे दूर किया जा सकता है।नेतृतव का पता तब रहता है जब पार्टी के लोगों से उसका निरंतर संवाद होता है। परिवारवादी पार्टियों की सबसे बड़ी खामी यही है कि नेतृत्व की निचले सतर पर बात ही नहीं होती है। महाराष्ट्र में क्या हुआ। पार्टी में नाराजगी है, ज्यादातर विधायक नाराज है और सीएम उध्दव ठाकरे को पता ही नही है। क्योंकि विधायकों से उनकी बात ही नही होती थी। परिणाम क्या हुआ जो उध्दव ठाकरे ने सोचा नहीं थी। एकनाथ शिंदे उनके सामने सीएम के दावेदार के रूप में खड़े हो गए। सच है शिंदे कभी खड़े नहीं हो सकते थे लेकिन भाजपा का सहयोग मिला तो उनमें हिम्मत आ गई और वह खड़े हो गए। शिंदे में कही तो सीएम बनने की इच्छा रही होगी। इस इच्छा को ठाकर परिवार ने पूरा नहीं किया तो मौका मिलने पर भाजपा ने पूरा कर दिया। राजनीीत में अपने दुश्मन को मौका नहीं देना चाहिए। उध्दव ने दिया और शिंदे व भाजपा ने उसका फायदा उठाया।कांग्रेस ने कर्नाटक,मप्र में मौका दिया तो भाजपा ने वहां मौके का फायदा उठाया।जब कांग्रेस मजबूत थी,पूरे देश में राज करती थी तो वह भी मौके का फायदा उठाकर विपक्षी दलों की सरकार केंद्र व राज्य में गिरा देती थी। आज कांंग्रस की जगह भाजपा ने ले ली है वह विपक्ष को और कां्ग्रेस को कमजोर करने का कौई मौका चूकती नहीं है। हाल ही में खबर आई है कि गोवा कांग्रेस में टूट होने वाली है।कमजोरी कांग्रेस में है वह अपने विधायकों को संतुष्ट नहीं कर पा रही है, भाजपा उनको मौका देखकर तोड़ लेती है और कांग्रेस को कमजोर करती जाती है। राजस्थान में भी भाजपा ने सचिन के जरिए सरकार गिरान की कोशिश की थी लेकिन गहलोत ने मामले को समय रहते सुलझा लिया। छत्तीसगढ़ को लेकर भी अटकले लगती रहती है,, आरोप लगते रहते है कि यहां भी भाजपा सरकार गिराने की कोशिश कर सकती है। कोयला कारोबारी सूर्यकांत तिवारी का आरोप है कि आयकर अधिकारियो ने उन्हें शिंदे की तरह सरकार गिराने का आफर दिया था। छत्तीसगढ़ तब तक सरकार नहीं गिराई जा सकती जब तक कम से कम तीस से पैंतीस विधायक बगावत न करेें। इतने विधायकों का एकजुट करने वाला कोई नेता अब तक तो सामने नहीं आया है। टीेएस सिंहदेव का नाम जरूर भूपेश बघेल की जगह सीएम बननेके लिए चर्चा में रहता है लेकिन टीएस सिंहदेव से इस बात की उम्मीद कोई नहीं करता है कि वह कांग्रेस से अलग होकर सरकार बना सकते है। वह तो कांग्रेस में रहकर ही छत्तीस$गढ़ का सीेएम बनना चाहते है। उनके पास समय है। वह इंतजार कर सकते हैं। इस बार नहीं बने तो वह उम्मीद कर सकते है ंकि अगला चुनाव जीतने पर आलाकमान उन्हें मौका दे सकता है। राजस्थान में कांग्रेस की हालत जितनी खराब है कम से कम छत्तीसगढ़ में तो उतनी खराब नहीं है।राजस्थान में हिंसा की जो घटनाए हुई हैं उससे वहां जो घ्रुवीकरण हुआ है वह कांग्रेस के लिए घातक साबित होगा। राजस्थान में परंपरा भी रही है कि पांच साल भाजपा रहती है तो पांच साल कांग्रेस सत्ता में रहती है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की स्थिति राजस्थान से तो बेहतर ही कही जा सकती है। भूपेश बघेल अशोक खुद को गहलोत से बेहतर सीएम साबित करने में सफल रहे हैं।