हमले की पृष्ठभूमि
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में आतंकियों ने हिंदू पर्यटकों को धर्म पूछकर निशाना बनाया था, जिसमें 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक की जान गई थी। इस घटना के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया था और प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कर दिया था कि इस बार जवाब सर्जिकल नहीं, निर्णायक होगा।
सटीक लक्ष्य, तगड़ा वार
सेना के अनुसार, यह हमला "न्याय की मांग" नहीं, "इंसाफ की घोषणा" था। रात के अंधेरे में चले इस ऑपरेशन में हाई-प्रिसिशन ड्रोन, ब्रह्मोस मिसाइल और विशेष बलों की मदद से आतंक के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। जिन जगहों पर हमला किया गया, उनमें मुजफ्फराबाद, कोटली, और बालाकोट जैसे पुराने आतंकी अड्डे शामिल हैं।
ऑपरेशन का संदेश
सेना ने बयान में कहा, “यह ऑपरेशन सिर्फ जवाब नहीं, संदेश है – अगर भारत की महिलाओं के सिंदूर पर हाथ डाला गया, तो जवाब सरहद पार मिलेगा।” रक्षा विशेषज्ञ इसे 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक से भी आगे का कदम मान रहे हैं।
अब क्या आगे?
सरकार ने अब तक इस कार्रवाई पर आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सेना प्रमुखों ने राष्ट्रपति को रिपोर्ट सौंप दी है। सूत्रों का कहना है कि यदि पाकिस्तान की ओर से कोई जवाबी हरकत होती है, तो अगला कदम और सख्त होगा।
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