यरूशलम/नई दिल्ली (वीएनएस)। पश्चिम एशिया में दो साल से जारी खूनी संघर्ष अब थमने की ओर है। इस्राइल और हमास के बीच ट्रंप की शांति योजना के तहत युद्धविराम समझौता शुक्रवार दोपहर स्थानीय समयानुसार 12 बजे से लागू हो गया। इस्राइली सेना ने पुष्टि की कि सैनिक अब निर्धारित ठिकानों पर लौट रहे हैं।
इस्राइली कैबिनेट ने इस समझौते को मंजूरी दी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि बंधकों की रिहाई के लिए सहमति बन चुकी है। एक इस्राइली सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि गाजा के करीब 50% हिस्से पर इस्राइल का नियंत्रण रहेगा, जबकि बाकी क्षेत्र मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण के लिए खुले रहेंगे।
युद्धविराम समझौते के मुख्य बिंदु
इस्राइल 2000 फलस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा, जिनमें सभी महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।
मिस्र सीमा खोली जाएगी और मानवीय सहायता गाजा तक पहुंचाई जाएगी।
अमेरिका 200 सैनिकों की अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक टीम इस्राइल भेजेगा।
इस्राइली सेना गाजा से चरणबद्ध वापसी करेगी।
हमास के वरिष्ठ नेता खलील अल-हय्या ने कहा – “हमने अपने लोगों के खिलाफ युद्ध समाप्त करने के लिए यह समझौता किया है।”
67 हजार मौतों के बाद मिली राहत
साल 2023 से चले आ रहे संघर्ष में अब तक 67 हजार से अधिक लोगों की मौत और लाखों लोगों के विस्थापन की खबरें हैं। गाजा में भुखमरी और मानवीय संकट चरम पर था। संयुक्त राष्ट्र और कई देशों के प्रयासों के बावजूद संघर्ष जारी था, लेकिन ट्रंप की मध्यस्थता से यह ऐतिहासिक समझौता संभव हो सका।
मोदी ने दी बधाई
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि “दुनिया में किसी भी रूप में आतंकवाद अस्वीकार्य है, और यह शांति समझौता वैश्विक स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।”
गाजा के लिए उम्मीद की किरण
लगातार बमबारी, बिजली और पानी की किल्लत से जूझ रहे गाजा के लोगों के लिए यह समझौता जीवन की नई शुरुआत माना जा रहा है। अब अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियां क्षेत्र में राहत और पुनर्निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी में हैं।
दो वर्षों से जलते पश्चिम एशिया को आखिरकार राहत की सांस — ट्रंप की मध्यस्थता से ‘शांति’ की पहली किरण दिखाई दी।
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