धान खरीदी वर्ष 2025-26 हेतु यूनिफाइड फार्मर पोर्टल में 101% कृषकों का पंजीयन पूर्ण

Posted On:- 2025-10-30




1.59 लाख किसानों ने कराया पंजीयन, 1.87 लाख हेक्टेयर रकबा हुआ दर्ज

बेमेतरा (वीएनएस)। आगामी धान खरीदी सीजन वर्ष 2025-26 के लिए राज्य शासन द्वारा एग्रीस्टैक प्रोजेक्ट के अंतर्गत किसान पंजीयन को अनिवार्य किया गया है। इस योजना के तहत प्रदेश भर के किसानों को एकीकृत (यूनिफाइड) किसान पोर्टल में पंजीकृत किया जा रहा है, ताकि उन्हें समर्थन मूल्य पर धान विक्रय की सुविधा मिल सके। पंजीयन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2025 निर्धारित की गई है। जिले की सभी प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को निर्देशित किया गया है कि वे एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से किसानों का नवीन पंजीयन एवं फसल रकबे का संशोधन कार्य प्राथमिकता के आधार पर संपादित करें। एग्रीस्टैक के माध्यम से किया गया पंजीयन ई-केवाईसी आधारित होता है, जिससे दोहराव की संभावना समाप्त हो जाती है और किसानों की वास्तविक पहचान सुनिश्चित होती है।

राज्य शासन द्वारा यह व्यवस्था इस उद्देश्य से की जा रही है कि कृषकों को शासकीय योजनाओं का लाभ पारदर्शी और निष्पक्ष रूप से प्राप्त हो सके। इसके लिए राज्य शासन ने एकीकृत किसान पोर्टल विकसित किया है, जिसमें प्रतिवर्ष 01 जुलाई से 31 अक्टूबर तक पंजीयन की प्रक्रिया संचालित की जाती है। इस वर्ष भी खरीफ सीजन हेतु यह प्रक्रिया निर्धारित अवधि में पूर्ण की जाएगी। इस बार किसान पंजीयन की प्रक्रिया में कृषि विभाग, खाद्य विभाग और राजस्व विभाग के बीच इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। खाद्य विभाग द्वारा धान खरीदी पोर्टल पर किसानों का डाटा एग्रीस्टैक की फार्मर रजिस्ट्री से ऐपीआई के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा, जो पूरी तरह से ई-केवाईसी आधारित होगा। साथ ही, राजस्व विभाग द्वारा संधारित ‘भुइयाँ पोर्टल’ में दर्ज किसानों की भूमि जानकारी और गिरदावरी रिकॉर्ड को भी आधार सीडिंग के माध्यम से एकीकृत किया जा रहा है।

जिले के कॉमन सर्विस सेंटर के साथ-साथ सहकारी समितियों के माध्यम से भी किसान आईडी बनाई जा रही है। गत वर्ष धान विक्रय करने वाले कुल 1.57 लाख कृषकों की तुलना में इस वर्ष अब तक 1.59 लाख अर्थात् 101% कृषकों का पंजीयन धान खरीदी हेतु किया जा चुका है।

साथ ही जिले के 1.64 लाख कृषकों की एग्रीस्टैक किसान आईडी भी बनाई जा चुकी है। अतः धान विक्रय हेतु इच्छुक सभी कृषकों से अपील की गई है कि वे सहकारी समितियों, सीएससी केंद्रों तथा संबंधित पटवारियों से संपर्क कर अपनी एग्रीस्टैक किसान आईडी बनवाएं। जिन किसानों द्वारा अभी तक अपने सभी खसरों को एग्रीस्टैक आईडी से नहीं जोड़ा गया है, वे तत्काल सहकारी समिति, पटवारी या तहसीलदार से संपर्क कर शेष खसरों को जोड़वाएं, ताकि सभी पंजीकृत खसरों में उत्पादित धान का विक्रय किया जा सके। जिले में पंजीकृत धान रकबा 1.87 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो जिले के कृषकों की सक्रिय भागीदारी और प्रशासनिक टीम की तत्परता को दर्शाता है।




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