रेरा के आदेश कागजों तक सीमित? सुपर बिल्ट-अप पर रोक के बावजूद जारी रजिस्ट्रियां

Posted On:- 2026-02-13




रायपुर (वीएनएस)। रियल एस्टेट क्षेत्र में कार्पेट एरिया बनाम सुपर बिल्ट-अप एरिया का विवाद एक बार फिर चर्चा में है। रेरा अधिनियम 2016 की धारा 2(के) में सुपर बिल्ट-अप एरिया का उल्लेख नहीं है और बिक्री कार्पेट एरिया के आधार पर किए जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद प्रदेश में कई बिल्डर सुपर बिल्ट-अप के आधार पर ही फ्लैट बेच रहे हैं और रजिस्ट्रियां भी उसी हिसाब से हो रही हैं।

रेरा ने 11 अक्टूबर 2024 और 30 अप्रैल 2025 को इस संबंध में आदेश जारी किए। 30 अप्रैल 2025 के आदेश में स्पष्ट लिखा गया कि रेरा अधिनियम में सुपर बिल्ट-अप एरिया का कोई प्रावधान नहीं है और रजिस्ट्री कार्पेट एरिया के आधार पर की जानी चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि विज्ञापनों और ब्रोशर में केवल कार्पेट एरिया का उल्लेख हो।

हालांकि आदेश में यह भी जोड़ा गया कि प्रमोटर बालकनी, सीढ़ी, कॉरिडोर या ओपन एरिया का अलग से उल्लेख कर सकते हैं। जानकारों का कहना है कि इसी बिंदु का सहारा लेकर बिल्डर सुपर बिल्ट-अप की अवधारणा को अप्रत्यक्ष रूप से जारी रखे हुए हैं। जमीनी स्तर पर न तो व्यापक जांच हुई और न ही रजिस्ट्रार कार्यालयों से यह जानकारी मांगी गई कि वास्तविक रजिस्ट्रियां किस आधार पर हो रही हैं।

क्या है कार्पेट और सुपर बिल्ट-अप एरिया?
कार्पेट एरिया वह वास्तविक क्षेत्र होता है, जिसका उपयोग घर के भीतर किया जाता है, जैसे कमरे, रसोई और बाथरूम। वहीं सीढ़ियां, लिफ्ट, कॉरिडोर और साझा हिस्से सुपर बिल्ट-अप में जोड़े जाते हैं। कई मामलों में 30 से 40 प्रतिशत तक क्षेत्र सुपर बिल्ट-अप में जोड़ दिया जाता है, जिससे उपभोक्ता को कम उपयोगी जगह के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है।

विशेषज्ञों का तर्क है कि बहुमंजिला इमारत में सीढ़ी या लिफ्ट आवश्यक हिस्सा है, लेकिन उसका अलग से मूल्य जोड़ना उपभोक्ता के लिए बोझ बन जाता है। प्रचार सामग्री में बड़े अक्षरों में सुपर बिल्ट-अप एरिया दिखाया जाता है, जबकि कार्पेट एरिया अपेक्षाकृत कम होता है। इससे खरीदार भ्रमित हो जाते हैं।

रेरा कानून के अनुसार एग्रीमेंट और रजिस्ट्री दस्तावेज में कार्पेट एरिया का स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य है। यदि सुपर बिल्ट-अप के आधार पर रजिस्ट्री की जाती है तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित राज्य रेरा में शिकायत की जा सकती है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि आदेश जारी होने के बावजूद निगरानी और कार्रवाई का अभाव क्यों है। उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि यदि सख्त जांच और दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो आदेश महज औपचारिकता बनकर रह जाएंगे।




Related News
thumb

सीईओ अभिषेक ने ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार ने जनपद पंचायत जशपुर अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों में संचालित निर्माण कार्यों का निरीक्षण किय...


thumb

खराब परीक्षा परिणाम पर सीईओ सख्त, शोकॉज नोटिस जारी करने के निर्देश

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार ने जिले के शासकीय हाई एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों के शैक्षणिक प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए खर...


thumb

जशपुर में कृषि को नया जीवन: नारायणपुर में बनेगा स्टॉप डैम, 150 हेक्...

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।


thumb

जशपुर विधायक राय मुनि भगत का कुशलक्षेम जानने अस्पताल पहुंचे पर्यटन ...

छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज रायपुर स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचकर जशपुर विधायक रायमुनि भगत से मुलाकात की और उनका कुशल...


thumb

सेवा संकल्प अभियान : महतारी वंदन योजना से महिलाएं बनीं सक्षम

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हो रही है। योजना ...


thumb

विशेष समाधान शिविर में 81 पेंशन और वेतन निर्धारण मामलों का ऑन-द-स्प...

जिले में लंबे समय से लंबित वेतन निर्धारण और पेंशन प्रकरणों के निराकरण के लिए जिला स्तरीय शिविर का आयोजन किया गया।कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, क...