नई दिल्ली(वीएनएस)।पड़ोसी देशों को किये जा रहे ऊर्जा सहयोग के मुद्दे पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत वर्ष 2007 से बांग्लादेश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति करता आ रहा है। इसके अतिरिक्त हाल ही में श्रीलंका के अनुरोध पर उसे 38 हजार मीट्रिक टन पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराए गए हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस वार्ता में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आज कई महत्वपूर्ण वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भारत की स्थिति स्पष्ट की। प्रेस वार्ता के दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति, पड़ोसी देशों के साथ ऊर्जा सहयोग, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता जैसे विषय प्रमुख रूप से सामने आए।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सबसे पहले लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भारत की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस समय लगभग छह सौ भारतीय सैनिक संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान में तैनात हैं। भारत कई दशकों से शांति अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाता रहा है और वह संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सबसे बड़ा सैनिक योगदान देने वाला देश है। उन्होंने हाल ही में इस मिशन पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इन हमलों में कई सैनिकों की जान गई है, जो अत्यंत दुखद है। भारत ने जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और शांति सैनिकों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
पड़ोसी देशों को किये जा रहे ऊर्जा सहयोग के मुद्दे पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत वर्ष 2007 से बांग्लादेश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति करता आ रहा है। इसके अतिरिक्त हाल ही में श्रीलंका के अनुरोध पर उसे 38 हजार मीट्रिक टन पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराए गए हैं। नेपाल और भूटान के साथ भी भारत का ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग लगातार जारी है। मालदीव सरकार ने भी अल्पकालिक और दीर्घकालिक आधार पर पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के लिए भारत से संपर्क किया है। इन अनुरोधों पर भारत अपनी उपलब्धता और घरेलू आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विचार कर रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी स्थिति पर चर्चा के लिए ब्रिटेन ने कई देशों को आमंत्रित किया है, जिसमें भारत भी शामिल है। इस बैठक में भारत की ओर से विदेश सचिव भाग ले रहे हैं। इसके अलावा भारत ईरान और अन्य संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित और निर्बाध मार्ग सुनिश्चित किया जा सके। पिछले कुछ दिनों में ऐसे प्रयासों के चलते छह भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं। ये जहाज रसोई गैस, तरलीकृत प्राकृतिक गैस और अन्य आवश्यक वस्तुएं लेकर जा रहे थे।
एक तरफ रक्षा सहयोग मजबूत करने की बात हो रही है तो दूसरी तरफ भारत लगातार मुश्किल वक्त में बांग्लादेश के साथ खड़ा भी नजर आ रहा है। हाल ही में ऊर्जा स...
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