मोहला (वीएनएस)। नन्ही चार्वी की मुस्कान समर्पण, जागरूकता और सही देखभाल की एक प्रेरक कहानी है, जिले के मोहला विकासखंड के जनजातीय ग्राम राजाडेरा से सामने आई है।
28 दिसंबर 2025 को जन्मी नन्ही चार्वी का वजन मात्र 1.8 किलोग्राम था, जिसके कारण वह बेहद कमजोर और नाजुक थी। यह स्थिति परिवार के लिए चिंता का विषय बन गई, क्योंकि चार्वी की माँ पहली बार माँ बनी थीं और उन्हें नवजात शिशु की देखभाल के बारे में सीमित जानकारी थी। परिवार असमंजस में था कि इतनी कमजोर बच्ची की देखभाल कैसे की जाए, ताकि उसका स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके और उसका विकास सही दिशा में हो।
इसी चुनौतीपूर्ण समय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती अन्नपूर्णा आशा की किरण बनकर सामने आईं। उन्होंने नियमित गृह भेंट के माध्यम से न केवल चार्वी की स्थिति पर नजर रखी, बल्कि उसकी माँ को शिशु देखभाल के महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने कंगारू मदर केयर की सरल और प्रभावी विधि अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिसमें मां अपने शिशु को त्वचा से त्वचा संपर्क में रखती है। साथ ही उन्होंने केवल स्तनपान के महत्व को भी समझाया और बताया कि यह शिशु के संपूर्ण पोषण और प्रतिरक्षा के लिए कितना जरूरी है।
श्रीमती अन्नपूर्णा ने अपनी भूमिका को केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सुपोषण चौपाल और ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस सत्रों के माध्यम से पूरे समुदाय को जागरूक किया। उन्होंने वीडियो और संवाद के जरिए अन्य माताओं और परिवारों को भी नवजात शिशु की देखभाल, पोषण और स्वच्छता के प्रति सजग किया। उनके प्रयासों से न केवल नन्ही चार्वी के परिवार में बल्कि पूरे गांव में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला।
धीरे-धीरे नन्ही चार्वी के परिवार ने सभी सुझावों को अपनाना शुरू किया। माँ ने आत्मविश्वास के साथ कंगारू मदर केयर और नियमित स्तनपान को अपनाया। निरंतर देखभाल और सही मार्गदर्शन का परिणाम यह हुआ कि कुछ ही समय में चार्वी का वजन 1.8 किलोग्राम से बढ़कर 3.3 किलोग्राम हो गया।
आज वही नन्ही चार्वी स्वस्थ, सक्रिय और मुस्कुराती हुई नजर आती है। उसकी मुस्कान न केवल उसके परिवार के लिए खुशी का कारण है, बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। यह कहानी बताती है कि यदि सही समय पर सही मार्गदर्शन, समर्पण और सामुदायिक सहयोग मिल जाए, तो हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है और हर नन्ही जिंदगी को सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य दिया जा सकता है।
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