सुकमा (वीएनएस)। जिले के ग्राम भेलवापाल में 18 अप्रैल 2026 को एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के 50 से 55 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर आधुनिक, लाभकारी एवं टिकाऊ खेती से जुड़ी उन्नत तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती, मृदा संरक्षण तथा सब्जी उत्पादन के वैज्ञानिक तरीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने और खेती को दीर्घकालिक रूप से सुरक्षित बनाना रहा।
कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के कीट वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक खेती प्रभारी डॉ. योगेश कुमार सिदार ने रासायनिक खेती से होने वाले दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने किसानों को बताया कि निरंतर रासायनिक उर्वरक व कीटनाशकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घटती है, लागत बढ़ती है और मानव स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। इसके विकल्प के रूप में उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाने का संदेश देते हुए इसके दीर्घकालिक लाभों पर प्रकाश डाला।
डॉ. सिदार ने किसानों को जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र एवं दशपर्णी अर्क तैयार करने की विधि को सरल भाषा में समझाया और उनके प्रभावी उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से मृदा स्वास्थ्य सुधार पर जोर देते हुए किसानों को मिट्टी का नमूना लेने की वैज्ञानिक प्रक्रिया समझाई तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि मिट्टी की जांच के आधार पर ही संतुलित पोषण प्रबंधन संभव है, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ लागत भी कम होती है।
वहीं कार्यक्रम में उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. गुंजेश्री गोंड ने किसानों को ग्रीष्मकालीन सब्जियों की उन्नत खेती के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने गर्मी के मौसम में उपयुक्त सब्जियों के चयन, उनकी देखभाल, सिंचाई प्रबंधन एवं उत्पादन तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही उन्होंने किसानों को अपने घर के आसपास पोषण वाटिका विकसित करने के लिए प्रेरित किया, ताकि परिवार को वर्षभर ताजी और पौष्टिक सब्जियां उपलब्ध हो सकें तथा बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार हो। उन्होंने किसानों को देसी सब्जियों के बीज संरक्षण एवं संवर्धन की सलाह भी दी, जिससे स्थानीय जैव विविधता सुरक्षित रह सके।
कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी सुरेश कुमार बैक, उद्यान अधीक्षक नवस तिग्गा, आत्मा परियोजना से ज्योति गावड़े, प्रतिमा, रोहित सलाम एवं परमेश सिंह सोरी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने किसानों को प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने हेतु प्रेरित किया।
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