बेमेतरा (वीएनएस)। छत्तीसगढ़ राज्य के जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने जनगणना कार्य को सुचारू एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपादित करने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने आगामी जनगणना को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने बताया कि यह जनगणना देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसके लिए तकनीकी संसाधनों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कलेक्टरों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए निर्देशित किया कि वे अपनी निगरानी में इस कार्य को प्राथमिकता के साथ संपादित कराएं।
बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी प्रगणक एवं पर्यवेक्षक अपने-अपने गणना ब्लॉकों का भौतिक सत्यापन (मुआयना) पूर्ण करें तथा ब्लॉकवार नजरी नक्शा तैयार कर लें। यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि किसी भी गणना ब्लॉक में एक भी मकान सूचीकरण से न छूटे, इस पर विशेष सतर्कता बरती जाए।
चरणबद्ध कार्यक्रम के तहत होगा कार्य :
जनगणना कार्य को दो मुख्य चरणों में संपन्न किया जाएगा, प्रथम चरण (मकान सूचीकरण एवं आवास गणना): यह चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक संचालित होगा, जिसमें प्रगणक घर-घर जाकर मकानों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं एवं संपत्तियों से संबंधित लगभग 33 बिंदुओं पर जानकारी एकत्रित करेंगे। द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना): यह मुख्य चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित विस्तृत जानकारी दर्ज की जाएगी।
डिजिटल एवं स्व-गणना की विशेष व्यवस्था :
इस बार जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता इसका डिजिटल स्वरूप है, डेटा संग्रह के लिए मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जाएगा, सभी प्रगणकों को ऐप के उपयोग हेतु प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए गए, नागरिकों को 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 के बीच ऑनलाइन स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प उपलब्ध कराया गया, ऑनलाइन जानकारी भरने वाले नागरिकों से प्रगणक केवल SE ID लेकर फील्ड सत्यापन करेंगे
व्यापक स्तर पर कर्मियों की तैनाती :
प्रदेश के 33 जिलों के 19,978 गांवों एवं नगरीय निकायों में इस कार्य के लिए लगभग 62,500 कर्मियों की तैनाती की गई है, जिनमें 51,300 प्रगणक, 9,000 पर्यवेक्षक शामिल हैं। प्रत्येक प्रगणक को अधिकतम 800 व्यक्तियों एवं 180 मकानों के सर्वे का दायित्व सौंपा गया है, ताकि कार्य सुचारू रूप से पूर्ण किया जा सके।
निगरानी के लिए कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन :
जिला स्तर पर जनगणना कार्य की सतत निगरानी के लिए 24x7 कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही नागरिकों की सहायता हेतु टोल-फ्री हेल्पलाइन 1855 के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया है।
गोपनीयता पर विशेष जोर :
जनगणना निदेशक ने स्पष्ट किया कि एकत्रित की गई सभी जानकारियां पूर्णतः गोपनीय रहेंगी। इनका उपयोग किसी भी प्रकार के कराधान, पुलिस जांच या कानूनी कार्यवाही में नहीं किया जाएगा, बल्कि केवल विकास योजनाओं के निर्माण एवं सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा। बैठक के अंत में नागरिकों से अपील की गई कि वे इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाएं और सही जानकारी प्रदान कर जनगणना कार्य को सफल बनाने में सहयोग करें।
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