सूरजपुर (वीएनएस)। जिले में भीषण गर्मी की स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी रेना जमील ने पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण हेतु महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आदेश के तहत दिनांक 01 मई 2026 से 30 जून 2026 तक दोपहर 12ः00 बजे से 3ः00 बजे तक पशुओं पर सामग्री रखकर अथवा सवारी के उपयोग पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य जीव जन्तु कल्याण बोर्ड रायपुर के द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी मौसमी दृष्टिकोण के अनुसार प्रदेश सहित समस्त मध्य भारत में मार्च-जून 2026 का तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। छत्तीसगढ़ राज्य में प्रतिदिन दोपहर 12ः00 बजे से 3ः00 बजे के बीच तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक निरंतर बना रहता है, ऐसी स्थिति में पशुओं पर सामग्री रखकर अथवा उन्हें टाँगे, बैलगाड़ी, भैंसागाड़ी, ऊँटगाड़ी, खच्चर, टट्टू गाड़ी एवं गधे पर वजन ढोने के कार्य में उपयोग करने से पशु बीमार हो सकते हैं अथवा उनकी मृत्यु भी हो सकती है।
‘परिवहन एवं कृषि पशुओं पर क्रूरता का निवारण नियम 1965‘ के नियम 6(3) के अनुसार जिन क्षेत्रों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहता है, उन क्षेत्रों में दोपहर 12ः00 बजे से 3ः00 बजे के मध्य ऐसे पशुओं का उपयोग प्रतिबंधित किया गया है। कलेक्टर ने समस्त अनुविभागीय दण्डाधिकारी (राजस्व) को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में निर्धारित अवधि के दौरान इस प्रतिबंध का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएँ तथा की गई कार्यवाही से कार्यालय को अवगत कराएँ।
इसी क्रम में जिले के उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवायें द्वारा भी समस्त संस्था प्रभारियों को विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। निर्देशों के अनुसार पशु चिकित्सा अधिकारी एवं कर्मचारी अपने क्षेत्र के ग्रामों एवं नगरीय क्षेत्रों का नियमित भ्रमण कर पशुपालकों एवं जनप्रतिनिधियों के संपर्क में रहेंगे। किसानों एवं पशुपालकों को पशुओं, पक्षियों एवं जानवरों को लू से बचाव के उपाय एवं रोकथाम हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
इस कार्य हेतु मोबाइल वेटनरी यूनिट 1962 के समस्त स्टाफ, सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी, पशु सखी, पशुधन मित्र एवं पशु प्रेमियों का सहयोग लिया जाएगा। लू-ताप घात से संबंधित कोई भी शिकायत/सूचना प्राप्त होने पर संबंधित पशु को तत्काल आवश्यक सहायता/उपचार उपलब्ध कराया जाएगा तथा ग्रामों में आवश्यक टीकाकरण कार्य भी संपादित किया जाएगा।
पशुपालकों को सलाह दी गई है कि पशुओं/पक्षियों का अत्यधिक धूप में परिवहन न करें तथा कृषि कार्य में जहाँ तक संभव हो अधिक तापमान में पशुओं के उपयोग से बचें। बेहतर होगा कि दोपहर के समय अपने पशुओं को छायादार स्थल पर बाँधकर रखें एवं चारा-पानी की समुचित व्यवस्था करें। ग्रीष्म ऋतु में पशुओं की सहायता से चलने वाले साधन, जिनमें वजन अथवा सवारी ढोने का कार्य किया जाता है, पूर्णतः प्रतिबंधित रहेंगे। जनपद पंचायतों एवं नगरपालिकाओं को भी निर्देशित किया गया है कि प्रत्येक ग्राम एवं नगरीय क्षेत्र में पशुओं हेतु पेयजल की व्यवस्था एवं संधारण सुनिश्चित कराएँ।
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