फर्जी निवास प्रमाणपत्र रैकेट का भंडाफोड़, CRPF जवान समेत गिरोह के कई सदस्य गिरफ्त में

Posted On:- 2026-05-30




बलरामपुर (वीएनएस)। छत्तीसगढ़ में फर्जी दस्तावेजों के जरिए स्थानीय निवास प्रमाणपत्र बनवाकर केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों में नौकरी दिलाने वाले बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है। बलरामपुर पुलिस ने इस मामले में सीआरपीएफ के एक जवान सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर 20 से अधिक स्थानीय निवास प्रमाणपत्र तैयार किए गए, जिनका उपयोग सीआरपीएफ, एसएसबी और सीआईएसएफ जैसी अर्द्धसैनिक बलों की भर्तियों में किया गया।

मामले का खुलासा तब हुआ जब बलरामपुर तहसीलदार ने 28 अप्रैल 2026 को थाना बलरामपुर में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि 204 कोबरा बटालियन में पदस्थ कांस्टेबल सुमित सिंह ने दूसरे व्यक्ति के शैक्षणिक दस्तावेजों में हेरफेर कर अपने नाम से स्थानीय निवास प्रमाणपत्र बनवा लिया। जांच में पता चला कि सुमित मूल रूप से राजस्थान का निवासी है, लेकिन उसने छत्तीसगढ़ का निवासी बनकर राज्य कोटे का लाभ लिया और वर्ष 2023 में सीआरपीएफ में भर्ती हासिल कर ली। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।

जांच के दौरान इस फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड के रूप में मध्यप्रदेश के मुरैना निवासी विवेक सिंह तोमर का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार विवेक और उसके सहयोगी आकाश शर्मा फर्जी दस्तावेज तैयार कर ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से स्थानीय निवास प्रमाणपत्र बनवाते थे। दोनों ने स्वयं भी फर्जी दस्तावेजों के जरिए छत्तीसगढ़ के निवासी प्रमाणपत्र हासिल किए थे।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क कई जिलों तक फैला हुआ था। आरोपी ओमप्रकाश चंद्रवंशी सहित अन्य सहयोगियों की मदद से ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर फर्जी नागरिक पहचान बनाकर दस्तावेजों में नाम और विवरण बदल दिए जाते थे। इसके बाद ऑनलाइन आवेदन कर स्थानीय निवास प्रमाणपत्र जारी करवा लिया जाता था। आरोपियों द्वारा एक प्रमाणपत्र बनवाने के एवज में 3 से 4 लाख रुपये तक वसूले जाते थे।

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि अब तक 20 से अधिक फर्जी स्थानीय निवास प्रमाणपत्रों का उपयोग अर्द्धसैनिक बलों की भर्तियों में किया जा चुका है। पुलिस संबंधित केंद्रीय सुरक्षा बलों को पत्र भेजकर ऐसे उम्मीदवारों की जानकारी जुटा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है और आशंका है कि इस रैकेट का दायरा और भी बड़ा हो सकता है।



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