नई दिल्ली(वीएनएस)।केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पश्चिम एशिया संकट के कारण विमान ईंधन की कीमतों में आई भारी अस्थिरता को देखते हुए भारतीय विमानन कंपनियों के लिए विमान ईंधन मूल्य स्थिरीकरण कोष को मंजूरी दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आज कई अहम फैसले लिये गये। फैसलों की जानकारी संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी। बैठक में विमानन क्षेत्र को राहत देने, दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण कम करने और देश के विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी देने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पश्चिम एशिया संकट के कारण विमान ईंधन की कीमतों में आई भारी अस्थिरता को देखते हुए भारतीय विमानन कंपनियों के लिए विमान ईंधन मूल्य स्थिरीकरण कोष को मंजूरी दी है। इसके तहत तेल विपणन कंपनियों को अधिकतम दस हजार करोड़ रुपये तक की ब्याज मुक्त सहायता दी जाएगी। यह सहायता पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में विमान ईंधन की कीमतें मार्च 2026 में लगभग साठ रुपये प्रति लीटर से बढ़कर मई में एक सौ बयालीस रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। विमानन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी लगभग चालीस प्रतिशत होती है। ऐसे में यह योजना घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं को स्थिर बनाए रखने में मदद करेगी। इसके तहत विमान कंपनियों को तीन वर्षों तक केवल सरकारी तेल कंपनियों से ही ईंधन खरीदना होगा। सरकार का मानना है कि इससे यात्रियों पर किराये का अतिरिक्त बोझ कम होगा और छोटे शहरों तक हवाई संपर्क बना रहेगा।
इसके साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण कम करने के लिए लगभग नौ हजार पांच सौ पचासी करोड़ रुपये की योजना को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पुराने ट्रकों और बसों को हटाकर नए और कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा। योजना का संचालन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड के माध्यम से किया जाएगा और इसमें दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश की सरकारें शामिल होंगी। योजना के अनुसार बीएस-4 या उससे पुराने मानकों वाले वाहनों को बदलकर बीएस छह अथवा विद्युत वाहनों को अपनाने पर प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार पांच वर्षों तक ऋण पर पांच प्रतिशत ब्याज सहायता देगी, ईंधन वाउचर उपलब्ध कराएगी और वाहन खरीद पर विशेष लाभ भी दिये जाएंगे। हम आपको बता दें कि दिल्ली एनसीआर में परिवहन क्षेत्र प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है और केवल तीन प्रतिशत भारी वाहन ही पीएम 2.5 प्रदूषण का छत्तीस प्रतिशत हिस्सा पैदा करते हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे लगभग दो लाख सात हजार वाहन मालिकों को लाभ मिलेगा और क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।
मंत्रिमंडल की बैठक में देश के कई राज्यों में महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई। मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग 347-बी के 233 किलोमीटर लंबे हिस्से के उन्नयन पर चार हजार चार सौ पंद्रह करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे। यह परियोजना बैतूल, खंडवा, खरगोन और बडवानी जिलों को बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करेगी। इसके तहत कई बाईपास भी बनाये जाएंगे जिससे यात्रा समय कम होगा और सड़क सुरक्षा में सुधार आएगा। परियोजना से वस्त्र उद्योग, मेगा फूड पार्क, ताप विद्युत संयंत्र तथा रेलवे और हवाई अड्डों को बेहतर संपर्क मिलेगा। सरकार के अनुसार इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों मानव दिवस रोजगार का सृजन होगा।
साथ ही तेलंगाना में राष्ट्रीय राजमार्ग-63 और 563 के लगभग 191 किलोमीटर हिस्से को चार लेन में विकसित करने की मंजूरी दी गई है। सात हजार पांच सौ सत्तानवे करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से निजामाबाद, जगतियाल, मंचेरियल और करीमनगर जिलों में यातायात सुगम होगा। परियोजना पूरी होने पर यात्रा समय में डेढ़ घंटे तक की कमी आने की उम्मीद है। यह सड़क परियोजना आर्थिक और सामाजिक केंद्रों को जोड़ने के साथ-साथ माल परिवहन को भी तेज करेगी।
इसके अलावा, बिहार में खगडिया से पूर्णिया तक राष्ट्रीय राजमार्ग-31 और 231 के एक सौ तैंतालीस किलोमीटर हिस्से को चार लेन बनाने की परियोजना को भी स्वीकृति मिली है। करीब तीन हजार नौ सौ छत्तीस करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना खगड़िया, भागलपुर, कटिहार और पूर्णिया जिलों को लाभ पहुंचाएगी। परियोजना के तहत पूर्णिया शहर के लिए ग्रीनफील्ड बाईपास भी बनाया जाएगा। इससे यात्रा समय घटकर लगभग दो घंटे रह जाएगा और माल परिवहन अधिक सुगम होगा।
इसके अलावा ओडिशा में रामेश्वर से पारादीप तक नए तटीय राजमार्ग निर्माण को मंजूरी दी गई है। लगभग आठ हजार तीन सौ करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत एक सौ साठ किलोमीटर लंबी सड़क विकसित की जाएगी। इससे पुरी, केंद्रापाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों को बेहतर संपर्क मिलेगा और यात्रा समय में ढाई घंटे तक की कमी आएगी। परियोजना से पर्यटन, मत्स्य उद्योग और बंदरगाह गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि इन सभी सड़क परियोजनाओं से क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और देश की लॉजिस्टिक क्षमता को मजबूती मिलेगी।
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