GPM जिला प्रशासन में बड़ा फेरबदल, अफसरों के बदले प्रभार; तहसीलदार-नायब तहसीलदारों के तबादले

Posted On:- 2026-07-04




गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (वीएनएस)। जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुचारू बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बड़े स्तर पर अधिकारियों के कार्यभार में फेरबदल किया है। कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन द्वारा जारी संयुक्त आदेश के तहत जिला मुख्यालय में पदस्थ राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के बीच नया कार्य विभाजन किया गया है। साथ ही विभिन्न तहसीलों में पदस्थ तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के प्रभार में भी बदलाव करते हुए आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।


नए आदेश के अनुसार जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकेश रावटे को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, पीएम ग्राम सड़क योजना, कृषि, क्रेडा, सी-मार्ट, महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क, पीएम जनमन योजना और बैगा विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अपर कलेक्टर दिलेराम डाहिरे को कानून-व्यवस्था, राजस्व अपील, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन, शस्त्र अनुज्ञप्ति और खाद्य सुरक्षा अधिनियम से जुड़े मामलों का प्रभार दिया गया है।


संयुक्त कलेक्टर निकिता मरकाम को एसडीएम मरवाही बनाया गया है, जबकि डिप्टी कलेक्टर अमित बेक को एसडीएम पेण्ड्रारोड की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं डिप्टी कलेक्टर आकांक्षा पाण्डेय, विक्रांत कुमार अंचल और देवेन्द्र कुमार सिरमौर को भी वित्त, स्थापना, निर्वाचन, डीएमएफ, भू-अभिलेख, भू-अर्जन, डिजिटल सर्वे, पर्यटन और अन्य महत्वपूर्ण शाखाओं की नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।


मैदानी स्तर पर भी व्यापक बदलाव किए गए हैं। शेषनारायण जायसवाल को पेण्ड्रारोड से पेण्ड्रा तहसीलदार बनाया गया है। प्रीति शर्मा अब गौरेला तहसील की कमान संभालेंगी, जबकि अविनाश कुजुर को मरवाही का नया तहसीलदार नियुक्त किया गया है। इसके अलावा उमेश कुमार चौहान, रमेश कुमार कमार, अंजली मिश्रा और दशोदा आर्मी के प्रभार में भी बदलाव किया गया है। नवीन तहसील सकोला के लिए आहरण एवं संवितरण (डीडीओ) का अस्थायी अधिकार तहसीलदार पेण्ड्रा को सौंपा गया है।


प्रशासनिक कार्यों में बाधा न आए, इसके लिए विभिन्न अधिकारियों के बीच लिंक ऑफिसर की व्यवस्था भी निर्धारित की गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि गौरेला, पेण्ड्रा और मरवाही नगरीय निकायों से जुड़े मामलों का अंतिम निराकरण कलेक्टर स्तर पर होगा, जबकि अन्य अविभाजित विषयों का निस्तारण भी कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी द्वारा किया जाएगा। इससे जिले में प्रशासनिक कार्यों के बेहतर समन्वय और त्वरित निष्पादन की उम्मीद जताई जा रही है।   



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