जंगल पर अवैध कब्जा: पेड़ काटकर खेत तैयार, ग्रामीणों ने वन विभाग पर उठाए सवाल

Posted On:- 2026-07-15




सारंगढ़-बिलाईगढ़ (वीएनएस)। जिले के सलिहा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत धनसिर बीट के मुनिचुआं क्षेत्र में जंगल की जमीन पर अवैध कब्जा कर पेड़ों की कटाई किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि तालाब और बांधा के आसपास कई एकड़ वनभूमि पर कब्जा कर जंगल साफ कर खेत तैयार किए जा रहे हैं, जबकि वन विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।

ग्रामीणों के अनुसार, कुछ लोगों ने जंगल की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की है। उनका आरोप है कि कब्जाधारी धनसिर बीट के अधिकारियों के संरक्षण में यह काम कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पिछले वर्ष भी इस मामले की शिकायत वन विभाग के अधिकारियों से की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे कब्जाधारियों के हौसले और बढ़ गए हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में भी जंगल में पेड़ों को काटकर खेत तैयार किए गए हैं। विरोध करने पर कब्जाधारी कथित तौर पर अधिकारियों को अपने पक्ष में होने की बात कहते हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जंगल के भीतर अवैध रूप से सीमांकन कर तारबंदी की गई है और कई स्थानों पर करंट प्रवाहित तार लगाए गए हैं, जिससे लोगों और मवेशियों की जान को खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले वर्ष करंट की चपेट में आने से कई गाय और बकरियों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद अवैध तारबंदी नहीं हटाई गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

ग्रामीणों ने मीडिया को मौके पर ले जाकर कथित अवैध कब्जे, पेड़ों की कटाई और खेत तैयार किए जाने वाले क्षेत्रों को दिखाया। उन्होंने वन विभाग से तत्काल अवैध कब्जा हटाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

वन विभाग का पक्ष
धनसिर बीट प्रभारी ऋषि दुबे ने बताया कि पिछले अभियान के दौरान अवैध कब्जा कर पेड़ काटने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। उनके अनुसार, करीब 520 पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया था, जिसमें प्रकरण दर्ज कर लगभग 12 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कुछ लोग अवैध गतिविधियां जारी रखे हुए हैं।

बीट प्रभारी ने दावा किया कि सभी अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ दोबारा सख्त कार्रवाई कर वनभूमि को कब्जामुक्त कराया जाएगा और बाद में वहां पौधरोपण कराया जाएगा।

अब देखने वाली बात होगी कि ग्रामीणों के आरोपों और सामने आए तथ्यों के बाद वन विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।



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