अब रोजी-रोटी के लिए नहीं करना पड़ता पलायन, गांव में ही मिल रहा रोजगार
सुकमा (वीएनएस)। कभी सीमित रोजगार और पलायन की मजबूरी झेलने वाले सुकमा के ग्रामीणों के लिए अब गांव में ही सम्मानजनक आजीविका का रास्ता खुल रहा है। विकसित भारत-गारंटी मिशन (ग्रामीण) के तहत 125 दिनों का रोजगार और 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मिलने से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। जिले की 134 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं, जिससे रोजगार के साथ गांवों की तस्वीर भी बदल रही है।
ग्राम पंचायत गादीरास के शासकीय माध्यमिक शाला परिसर में बन रही इंटरलॉकिंग पेवर ब्लॉक सड़क इसका जीवंत उदाहरण है। यह निर्माण कार्य स्थानीय लोगों को रोजगार दे रहा है, वहीं स्कूल पहुंचने वाले बच्चों के लिए भी बड़ी राहत बन गया है। बरसात में कीचड़ से जूझने वाले विद्यार्थियों को अब सुरक्षित और सुगम रास्ता मिल रहा है। शिक्षक बसंत शर्मा बताते हैं कि पहले बारिश के दिनों में बच्चों के जूते-कपड़े गंदे हो जाते थे और स्कूल पहुंचना मुश्किल होता था, लेकिन अब यह समस्या लगभग समाप्त हो गई है।
योजना का सबसे बड़ा असर ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर दिखाई दे रहा है। श्रमिक रवि पेद्दी का कहना है कि पहले रोजगार के दिन कम होने से परिवार चलाना कठिन था, लेकिन अब 125 दिनों तक काम और बढ़ी हुई मजदूरी मिलने से घरेलू जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं और भविष्य के लिए बचत भी संभव हो रही है। वहीं अरविंद पेद्दी कहते हैं कि गांव में ही रोजगार मिलने से अब रोजी-रोटी के लिए बाहर पलायन नहीं करना पड़ता।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मुकुंद ठाकुर के अनुसार जिले में पेवर ब्लॉक सड़क, गाय शेड, बकरी शेड, पंचायत भवन, पीडीएस भवन और आवास निर्माण जैसे अनेक विकास कार्य तेजी से संचालित किए जा रहे हैं। जिले की 160 ग्राम पंचायतों में से 134 ग्राम पंचायतों में कार्य प्रगति पर हैं, जो 84 प्रतिशत प्रगति के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। योजना में जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका संवर्धन और आपदा निवारण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
ग्रामीणों का मानना है कि यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में विकास और आत्मनिर्भरता की नई नींव रख रही है। श्रमिक दुक्कूराम यादव सहित स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में हो रहे विकास कार्यों से आय बढ़ी है, जीवन स्तर बेहतर हुआ है और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। बढ़े हुए रोजगार दिवस और बेहतर मजदूरी ने ग्रामीणों के भविष्य में नई उम्मीद जगा दी है।
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