सस्ता खून - महंगा खून

Posted On:- 2026-07-19




- विकल्प नंदा

अपने घर से निकलते ही कुछ दूर चलते ही मेरा मन हमेशा की भांति कुछ समाचारों कुछ अफवाहों और कुछ दैहिक भौतिक विषयों पर मनन कर रहा था। विधायक निवास बनाने की चाहत में जनता जनार्दन के आशीष से चुनी हुई सरकार के महंगे खून वाले सेवकों ने नकटी गांव में सस्ते खून वाले आवासहीनों को शासन प्रदत्त आवास  तोड़ दिए। यदि जमीन अवैध थी तो पीएम आवास कैसे मिला, और अगर योजना वैध थी तो बुलडोजर क्यों चला?

मैं तात्यापारा से तारीबन रुके हुए ट्रैफिक में अपने वाहन के सहारे रेंगता हुआ शारदा चौक तक पहुंचा तो मेरे मन में ये सवाल कुलबुलाने लगा कि 26 साल हुए रायपुर को राजधानी बने  महंगे खून वाले तात्यापारा से लेकर शारदा चौक के दोनों तरफ सम्मानीय नागरिकजनों के प्रतिष्ठान सड़क चौड़ी करने कब तोड़े जाएगे? क्योंकि इस सड़क के संकरे होने के कारण महंगे खून वाले और सस्ते खून वाले दोनों के आवागमन में बाधा होती है ।

मैं फिर सोचने लगा कि जिन महंगे खून वाले जिन शासकीय सेवकों ने सस्ते खून वाले लोगों के घर तोड़ दिए, उन शासकीय सेवकों के मकान कहां होंगे ?
आदेश पारित करने वाले तो जरूर महंगे खून वाले लोग रहे होंगे लेकिन जिन बुलडोजर ड्राइवरों ने सस्ते खून वालो के मकान तोड़े उन ड्राइवरो की गिनती तो सस्ते खून वालो में होती होगी फिर उन ड्राइवरों के हाथ क्यों नहीं थर्राए ? क्यों उनके कान ग्रामीणों की चीख पुकार किसी बहरे की तरह अनसुने कर गए ?

जवाब जो मुझे समझ आया कि महंगे खून वाले चाहे जितना घमंड कर ले और सस्ते खून वाले चाहे जितना लाचारी जता कर विलाप कर ले, सवाल महंगे और सस्ते खून का है ही नहीं , ना कभी था।

सवाल तो गर्म और ठंडे खून का है। अगर आजादी के दौर में भी नागरिक अपने महंगे खून पर इतराते रहते और अपने सस्ते खून की दुहाई देकर सिर्फ लाचार बने रहते तो देश कभी आजाद ही नहीं हो पाता। जिस दिन खून में उबाल आएगा उस दिन ये भ्रष्टचार का तंत्र अपने आप ठीक हो जाएगा, जिस दिन खून में उबाल आएगा उस दिन हमें संवेदनाहीन होने का नाटक कर के अपनी रोजी रोटी कमाने का बहाना नहीं करना पड़ेगा ।

जिस दिन खून में उबाल आएगा उस दिन राजनैतिक दलों के पक्ष विपक्ष के नेताओं को याद आएगा कि उन्होंने राजनीति देश बदलने शुरू की थी भ्रष्टाचार का हिस्सा बनने नहीं। जिस दिन खून में उबाल आएगा उस दिन शासकीय सेवकों को याद आएगा कि शासकीय सेवा जनसेवा के लिए होती है मेवा बटोरने के लिए नहीं। जिस दिन खून में उबाल आएगा उस दिन किसी की हिम्मत नहीं होगी किसी भी नागरिक के साथ नाइंसाफी करने की। हां लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि खून में उबाल कब आएगा ?



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