राज्य में इन दिनों लोगों को लग रहा है कि पहले से ज्यादा बिजली बिल आ रहा है।लोग मीडिया को बता रहे हैं कि अप्रैल से बिल ज्यादा आ रहा है,कुछ लोगों का कहना हैै कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद बिजली बिल ज्यादा आ रहा है। कोई कहता है कि पहले हमारे यहां बिजली बिल दो हजार रुपए आता था अब वह ३३०० और ३६०० आ रहा है,कोई कहता है कि अप्रैल मे एक हजार.मई में छह हजार और जून में आठ हजार आया है।कोई कहता है कि मेरा बिल ७००-८०० रुपए आता था, अब १९२० और ३२५० रुपए आया है.कोई बताता है कि अप्रैल में १७४०,मई में ४४२० बिल आया है।उस पर बुरा लोगों को यह लगता है कि जब बिजली विभाग शिकायत करने जाते हैं तो शिकायतें दर्ज नहीं की जाती हैं,समाधान में अनावश्यक देरी हो रही है।लोगों का कहना है कि बिजली बिलों की जांच कर वास्तविक खपत के आधार पर संशोधित बिल जारी करना चाहिए और शिकायतें जल्दी दूर की जानी चाहिए।
सीधी सी बात है कि यह जनता का अनुभव है। सरकार जैसे पिछली सरकार की तुलना मे खुद को कई मामलों में बेहतर बताती है उसी तरह जनता को इस बात का एहसास किसी न किसी क्षेत्र में तो ऐसा होता है कि बिजली के मामले में उनको इस सरकार से ज्यादा पिछली सरकार में फायदा था क्योंकि ४०० यूनिट बिजली बिल आने पर २०० यूनिट का पैसा पटाना पड़ता था।कम से कम एक हजार रुपए की बचत होती थी।बिजली बिल दो तीन हजार भी आता था तो लोगों को लगता था कि एक हजार रुपए की बचत हुई है। बिजली कम आने व पैसा बचने का जो एहसास भूपेश बघेल सरकार के समय होता था, उसकी तुलना आज साय सरकार के समय लोग कर रहे हैं तो उनको लगता है कि उनको पहले से ज्यादा बिजली बिल देना पड़ रहा है। बिजली बिल पहले से ज्यादा आ रहा है। यानी पैसा बच नहीं रहा है, ज्यादा पैसा जेब से देना पड़ रहा है।
लोगों को भले ही यह सच मालूम न हो कि बिजली बिल क्याें ज्यादा आ रहा है, उनको यह तो मालूम है कि बिजली बिल पहले से ज्यादा आ रहा है।कुछ लोगों ने मान लिया कि यह स्मार्ट मीटर लगाने के कारण आ रहा है। हो सकता है कि बिजली बिल ढाई साल में कई बार बिजली दर बढ़ने के कारण ज्यादा आ रहा हो, हो सकता है कि गर्मी में पंखा कूलर ज्यादा चलने के कारण बिजली बिल ज्यादा आ रहा हो, हो सकता है कि पुराने मीटर में वास्तविक खपत के अनुसार बिजली बिल न आ रहा हो और स्मार्ट मीटर के कारण अब वास्तविक खपत के अनुसार बिजली बिल आ रहा हो. यानी बिजली बिल ज्यादा आने के कारण तो कई हो सकते हैं लेकिन लोगों के मन में यह धारणा बनाने का प्रयास कांग्रेस कर रही है कि स्मार्ट मीटर के कारण बिजली बिल ज्यादा आ रहा है। वह स्मार्ट मीटर के खिलाफ लोगों से फार्म भरवा रही है,जमा करवा रही है लोगों से कह रही है कि स्मार्ट मीटर के नाम पर संगठित लूट की जा रही है ताकि इसे आने वाले में जनता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बना सके।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने बयान जारी कर कहा है कि यूपी के सीएम योगी के मंत्रिमंडल ने जैसे घरों से स्मार्ट मीटर हटाने का फैसला किया है क्योंकि स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत ज्यादा आ रही थी, यहां भी साय सरकार को बिजली खपत ज्यादा आने को देखते हुए स्मार्ट मीटर घरों से हटाने का फैसला करना चाहिए। यानी कांग्रेस ज्यादा बिजली बिल को लेकर एक एक कदम आगे बढ़ रही है।वह लोगों को बता रही है, समझा रही है कि बिजली बिल ज्यादा आ रहा है तो इसके लिए सरकार दोषी है। यूपी की भाजपा सरकार इस समझ रही है तो यहां की भाजपा सरकार को भी समझना होगा कि इससे लोगों को परेशानी हो रही है।
यह सच है कि बिजली विभाग की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि स्मार्ट मीटर बिजली बिल नहीं बढ़ाता है।वह तो वास्तविक खपत के आधार पर सटीक बिल तैयार करता है।विभाग को बढ़े हुए बिजली बिल के विषय में साफ कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता का बिजली बिल बढ़ा है तो उसका प्रमुख कारण बिजली की पहले से ज्यादा खपत व उच्च टैरिफ स्लैब में पहुंचना है। बिजली विभाग का यह भी साफ कहना है कि स्मार्ट मीटर वास्तविक समय में बिजली की खपत की जानकारी उपलब्ध कराता है।मोर बिजली एप के माध्यम से बिजली उपभोक्ता हर आधे घंटे में देख सकता है कि उसके घर में रोज कितनी बिजली खपत हो रही है। इससे वह जान सकता है कि कौन से बिजली चलने वाले उपकरण के कारण ज्यादा बिजली खपत हो रही है और वह बिजली की खपत कैसे कम कर सकता है।
लोग बिजली विभाग से बिजली बिल ज्यादा आने के लिए स्मार्ट मीटर की जांच कराना चाहें तो वह जांच भी तो मुफ्त नहीं होती है। लोग बिजली विभाग में शिकायत करें कि हमारे मीटर मे ज्यादा बिजली बिल आ रहा है क्यों आ रहा है इसकी जांच की जाए और मुफ्त जांच हो जाती तो भी लोगों को संतोष होता कि ठीक है मीटर में खराबी नहीं है, हमारी खपत बढ़ गई है। बिजली विभाग तो मीटर जांच की शिकायत पर कम से कम ५०० रुपए और अधिकतम एक हजार रुपए जांच करने का लेता है।इससे गरीब लोग,मध्यम वर्ग के लोग मीटर की जांच भी नहीं करा पा रहे हैं।ऐसे में स्मार्ट मीटर को कांग्रेस एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना सकती है।वह फार्म भरवा रही है, लाखों फार्म हो जाएंगे तो वह सरकार से कहेगी कि देखों राज्य के लाखों लोग चाहते हैं कि स्मार्ट बिजली मीटर बदला जाए।सरकार नहीं बदलवाती है तो कांग्रेस अगले चुनाव में मीटर बदलने का वादा कर सकती है।सस्ती बिजली का वादा कर सकती है। यानी साय सरकार भले ही कई क्षेत्रों में अच्छा काम कर रही है लेकिन बिजली क्षेत्र में बिजली बिल ज्यादा आने से लोग परेशान है,उनको लगता है कि पहले बिजली बिल जैसे कम आता था, वैसे ही कम आना चाहिए। ज्यादा बिजली बिल लाखों से जुड़ा संवेदनशील मामला है, सरकार को इसे बिजली विभाग के भरोसे नहीं छोडऩा चाहिए, उसी तरह गंभीरता से लेना चाहिए जैसे कांग्रेस ले रही है।
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