नई दिल्ली(वीएनएस)।नीट-यूजी 2026 विवाद के बाद लाए गए इस संशोधन विधेयक को बीजेपी सांसद स्वराज ने एक समझदार और ज़िम्मेदार सरकार का कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक केंद्रीय जांच टास्क फोर्स, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और त्वरित जांच व फ़ैसले के प्रावधानों के साथ अधिकार-क्षेत्र से जुड़ी कमियों को दूर करेगा, जिससे भारत की परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और पवित्रता बहाल हो सकेगी।
लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर बहस के दौरान, बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर परीक्षा पेपर लीक के मामले में चुनिंदा आक्रोश दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि परीक्षाओं की शुचिता से इस तरह का समझौता न तो नया है और न ही किसी खास सरकार तक सीमित है। NEET-UG 2026 परीक्षाओं को लेकर हुए विवादों के बाद, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने 27 जुलाई को यह बिल पेश किया।
स्वराज ने कहा कि इससे पहले कि विपक्ष मुझ पर 'व्हाट-अबाउटरी' (दूसरों की गलतियाँ गिनाकर अपनी बात से ध्यान भटकाने) का आरोप लगाए, मैं यह साफ़ कर दूँ कि यह 'व्हाट-अबाउटरी' का मामला नहीं है, बल्कि मैं विपक्ष के चुनिंदा मुद्दों पर गुस्सा दिखाने के रवैये पर सवाल उठा रही हूँ। अगर यह लड़ाई सिद्धांतों की है, तो सरकार को देखकर सिद्धांत कैसे बदल जाते हैं?" उन्होंने इस संशोधन को केंद्र सरकार के नज़रिए का सबूत बताते हुए कहा, "यह संशोधन लाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समझदार और ज़िम्मेदार सरकार का सबूत है। प्रधानमंत्री मोदी का यह कहना कि पेपर लीक एक गंभीर अपराध है, सिर्फ़ एक बयान नहीं बल्कि उनकी सरकार का इरादा है, और इसीलिए आज यह संशोधन यहाँ लाया गया है।
बीजेपी सांसद ने कहा कि नई चुनौतियों के साथ कानूनों में भी बदलाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून एक जीवंत चीज़ है। इसे सामने आने वाली चुनौतियों के साथ बदलना चाहिए। हमारे जैसे बड़े और जटिल लोकतंत्र में, परीक्षा ही सबसे सही और योग्यता पर आधारित प्रक्रिया है, जहाँ एक ही समय पर, एक मज़दूर का बेटा और एक CEO की बेटी एक साथ बैठकर एक जैसे सवालों के जवाब देते हैं और उन्हें एक ही पैमाने पर परखा जाता है। जब ऐसी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठता है, तो भारत के सबसे मेहनती बच्चों को जोड़ने वाला पवित्र भरोसा कमज़ोर पड़ जाता है। यह भरोसा कि भारत में सिर्फ़ मेहनत और योग्यता ही मायने रखती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक संगठित "परीक्षा माफिया" अलग-अलग राज्यों में काम कर रहा है और कहा कि यह संशोधन अधिकार-क्षेत्र से जुड़ी कमियों को दूर करने के लिए लाया गया है। स्वराज ने बताया कि यह बिल अधिकार-क्षेत्र को लेकर होने वाली उलझन को सुलझाने और खत्म करने में मदद करता है, क्योंकि इसमें यह प्रावधान है कि केंद्र सरकार जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स बना सकती है। इसमें यह भी प्रावधान है कि हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश में एक स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाया जाए। इतना ही नहीं, यह बिल जांच एजेंसियों से जांच को सिर्फ़ दो महीने में पूरा करने और फास्ट-ट्रैक कोर्ट से तीन महीने में फ़ैसला सुनाने के लिए भी कहता है।
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