ऩई दिल्ली(वीएनएस)।नितिन नवीन ने 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' पर 1947 के बंटवारे में जान गंवाने और विस्थापित हुए लोगों को श्रद्धांजलि दी, यह कहते हुए कि उन घटनाओं का दर्द आज भी सबके दिलों में बसा है। उन्होंने बंटवारे को सत्ता के लालचियों की जल्दबाज़ी का परिणाम बताया, जिससे लाखों भारतीयों को खून की होली खेलनी पड़ी और अपने अपनों को खोना पड़ा।
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने 1947 के बंटवारे के दौरान अपनी जान और घर गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उन घटनाओं का दर्द हमारे दिलों में बसा हुआ है। गुरुग्राम में 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, नवीन ने इस दिन को उन लाखों लोगों को याद करने का एक गंभीर क्षण बताया जो विस्थापित हुए और जो हिंसा में मारे गए। उन्होंने कहा कि आज उन लोगों की यादों को ताज़ा करने का दिन है जिन्होंने बलिदान दिया और जो बंटवारे की भयावहता के कारण विस्थापित हुए। मैं आज उन सभी परिवारों को नमन करता हूँ जिन्होंने अपनों को खोया और विस्थापन का दर्द सहा; मैं उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
उन्होंने आगे कहा कि जिन परिवारों ने यह दर्द सहा और इस भयावहता को देखा, अगर हम उनकी यादों को ज़रा भी याद करें, तो मेरा मानना है कि शायद हममें से किसी के भी जीवन में ऐसा मुश्किल पल कभी नहीं आया होगा। नवीन ने बताया कि बंटवारे से प्रभावित कई परिवार भारत आ गए और देश के विकास में योगदान दिया। उन्होंने 1940 के लाहौर प्रस्ताव का ज़िक्र करते हुए कहा कि जब 1940 में लाहौर प्रस्ताव में 'दो-राष्ट्र सिद्धांत' (two-nation theory) पर चर्चा हुई, तो उसी समय - आज़ादी से पहले ही - हमारे लोगों को यह अंदाज़ा हो गया था कि जब देश को आज़ादी मिलेगी, तो उस आज़ादी की कीमत बंटवारे के रूप में चुकानी पड़ेगी... जिन लोगों की नज़र सत्ता पर थी, जिन्होंने अपने लिए सुनहरे सपने देखे थे, उन्हें तो सत्ता मिल गई; लेकिन जिन्होंने आज़ादी के सपने देखे थे, उन्हें खून की होली खेलनी पड़ी; उन्हें अपने अपनों को खोना पड़ा।
उन्होंने आगे कहा कि यह दर्द आज भी हम सबके दिलों में कहीं न कहीं मौजूद है। जिन लोगों ने सत्ता के इस हस्तांतरण में जल्दबाज़ी की और सोचा कि इस बंटवारे में उनका भविष्य है, उन्होंने अपना भविष्य तो सुरक्षित कर लिया, लेकिन लाखों भारतीयों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' 14 अगस्त को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विभाजन के पीड़ितों को याद करना और आज की पीढ़ी को उस दौरान झेली गई पीड़ा की याद दिलाना है।
यहां आयोजित एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1947 के विभाजन और नरसंहार के लिए कांग्रेस की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया...
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