मांगें मानकर छात्रों के आगे झुकी झारखंड सरकार

Posted On:- 2026-08-18




सुनील दास

किसी भी देश में युवा व छात्र एक बड़ी ताकत होते हैं,वह जब अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरते हैं तो कोई भी सरकार हो देरसबेर उसे छात्रों की मांगों को मानना ही पड़ता है।छात्रों के आगे सरकार को झुकना पड़ता है क्योंकि युवा व छात्रों की इतनी ताकत होती है कि वह किसी देश मे सरकार का तख्ता पलट कर सकते हैं, चुनी हुई सरकार को इस्तीफा देने को विवश कर सकते हैं,अपने ही देश में अराजकता फैला सकते हैं।अपने ही देश को नुकसान पहुंचा सकते हैं, भारत के पड़ोसी देशों में युवाओं ने ऐसा किया है, इसलिए हमारे यहां के कुछ राजनीतिक दलों के नेता तो चाहते हैं कि इस देश के युवा भी देश मे अराजकता फैलाएं।जंतर मंतर में युवाओं के आंदोलन के जरिए ऐसा करने का प्रयास शुरू किया गया लेकिन देशविरोधी ताकतों की साजिश को सरकार समझ गई और उसने युवाओं के विश्वास को जीतने का प्रयास शुरू किया और उसमें काफी हद तक वह सफल रही। शिक्षामंत्री को इस्तीफा देना पड़ा,इसका परिणाम यह हुआ कि जो लोग देश में अराजकता फैलाना चाहते थे, वह नहीं फैला सके। शुक्र है कि हमारे देश के युवा भी समझदार हैं और उन्होंने देशविरोधी ताकतों की साजिश को समझा और सरकार पर भरोसा किया और सरकार भी उनकी उम्मीदों को पूरा करने का प्रयास कर रही है।
देश में जंतर मंतर के आंदोलन की मांग शिक्षामंत्री के इस्तीफे की थी और केंद्र सरकार ने इस मांग को पूरा किया तो यह आंदोलन एक महीने में समाप्त हो गया।इस आंदोलन में परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग नहीं की गई थी, लेकिन सरकार ने अपनी तरफ से परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कानून बनाई और भविष्य में तकनीकी सुधार के लिए एक टास्कफोर्स का गठन भी किया ताकि भविष्य मे नीट परीक्षा में कोई पेपर लीक न हो, परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी न हो।जंतरमंतर का आंदोलन परीक्षा में हुई गड़बड़ी के विरोध में था और वह एक ही मांग शिक्षामंत्री के इस्तीफे से समाप्त हो गया। इस आंदोलन के दौरान यदि संसद घेरने य़ुवाओं का उपयोग नहीं किया गया होता यह आंदोलन भी एक अच्छे व प्रभावी आंदोलन में गिना जाता लेकिन पैसे देकर बुलाए गए बहुत से बाहरी लोगों की गाली,अश्लील भाषा, गंदे बैनर पोस्टर से जंतर मंतर के आंदोलन की आलोचना भी हुई है। बिहार के छात्रों ने इससे सबक लिया और अपनी तमाम मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आदोलन किया, विधानसभा का घेराव भी किया लेकिन उनकी उस तरह आलोचना नहीं हुई जितनी आलोचना जंतर मंतर के आंदोलन की हुई।झारखंड के छात्रों ने देश के छात्रों के सामने एक उदाहरण रखा है कि छात्र और युवा यदि शांतिपूर्ण आंदोलन करते हैं तो कोई भी सरकार हो उसकाे झुकना पड़ता है।
हर सरकार की तरह झारखंड सरकार ने २४ दिन तक कई तरह आंदोलन समाप्त करने के लिए प्रयास किए,कभी कहा कि छात्रों की सारी मांगे नहीं मानी जा सकती,कभी बातचीत के जरिए मनाने का प्रयास किया,कभी टेंट न लगाने देकर उनकी परेशानी बढाई,कभी उसे भाजपा का आंदोलन कहा गया,कभी बाहरी लोगों को भेजकर आंदोलन को हाईजैक करने का प्रयास किया गया,बिधानसभा घेरने पर छात्रों के खिलाफ ढेर सारी एफआईआर दर्ज की गई, छात्रों को तिरंगा रैली नहीं निकालने दिया लेकिन छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे तो आखिर में जाकर २४ दिन बाद सरकार ने एक मांग को छोड़कर सारी मांगे मानने का फैसला किया और झारखंड के छात्रों का आंदोलन इस तरह समाप्त हो गया है तो यह एक राज्य नहीं देश के छात्रों की जीत है और उनके लिए संदेश है कि देश में या राज्य में युवाओं का आंदोलन इसी तरह होना चाहिए।इससे देश को नुकसान पहुंचाए बिना भी छात्र अपनी मा्ंगे पूरी करवा सकते हैं।
छात्रों के साथ बैठक के बाद सीएम हेमंत सोरेन मीडिया को बताया कि जेएसएससी सीजीएल परीक्षा और जेपीएससी की नियुक्ति परीक्षाओं का संचालन करने वाली विवादित एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित जेपीएससी की सभी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं।इन परीक्षाओं की जांच झारखंड उच्च न्यायालय के रिटायर जज की अध्यक्षता में गठित होने वाली कमेटी करेगी।इतना ही नहीं झारखंड में २०१४ के बाद हुई अऩ्य परीक्षाएं भी जांच के दायरे में रहेंगी।जंतर मंतर के आंदोलन के बाद देश की नजर झाऱखंड के आंदोलन पर थी और सबको इंतजार था कि इनकी मांग सरकार कब पूरा करेगी। जंतर मंतर व झारखंड के युवाओं के आंदोलन से चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारे अब युवाओं की समस्याओं को लेकर सजग हो गई है और उनसे बातचीत कर उनकी समस्याओं को जानने का प्रयास कर रही हैं ताकि किसी राज्य में युवा आंदोलन न शुरू कर दें। खासकर उन राज्यों में जहां इस साल के आखिरी में या अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी युवाओं के आंदोलन से बहुत खुश हैं। वह देश के कई खासकर भाजपा शासित राज्यों में युवाओं को अपने और कांग्रेस से जोड़ने के लिए गूंज कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं।वह सोचते हैं कि युवाओं में जो नाराजगी किसी भी कारण से है, उसे मोदी की तरफ मोड़ देने से युवाओं का भरोसा उन पर और कांग्रेस पर बढ़ जाएगा और इसका फायदा कांग्रेस को आने वाले चुनाव में जरूर मिलेगा।राहुल गांधी सोचते हैं कि वह देश के युवाओं की मात्र तारीफ करेंगे तो युवा उनको अपना नेता मान लेंगे यही वजह है कि वह आए दिन कहते रहते हैं कि पीएम मोदी के हिंसक शासन के खिलाफ मजबूती के खड़े होकर जवाबदेही की मांग करने वाले भारत के युवाओं का साहस और दृढ़ता सराहनीय है।वह भूल जाते हैं कि मोदी ने तो कह दिया है बता दिया है कि वह युवाओं के लिए क्या करने वाले हैं लेकिन राहुल गांधी ने अब तक कई गूंज कार्यक्रम के बाद भी नहीं बताया है कि वह युवाओं के लिए क्या करने वाले हैं। ऐसे में युवा राहुल गांधी पर भरोसा करें तो कैसे करें। उन्हें तो पता नहीं है कि राहुल गांधी की सरकार कब बनेगी,राहुल गांंधी कब पीएम बनेंगे।जबकि युवाओं को मालूम है कि भाजपा अगला चुनाव जीती तो पीएम मोदी ही रहेंगे इसलिए वह उनकी वर्तमान व भविष्य की मांगे पूरी कर सकते हैं।उनके लिए बहुत कुछ कर सकते हैं।



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