आजिविका विभिन्न गतिविधियों से मिली लखपति दीदी की पहचान
अम्बिकापुर (वीएनएस)। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बिहान योजना के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आज आजीविका के नए अवसरों को अपना रही हैं। इसी क्रम में अम्बिकापुर विकासखंड के सकालो ग्राम पंचायत की रहने वाली कल्पना सिंह मां महामाया महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। समूह के माध्यम से ऋण लेकर कृषि कार्य को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। कृषि गतिविधियों से बढ़ती आमदनी के चलते कल्पना सिंह अब ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
श्रीमती कल्पना सिंह बताती हैं कि उन्होंने अपने समूह के माध्यम से डेढ़ लाख रुपए का ऋण कृषि कार्य के लिए लिया, जिससे उन्होंने खीरे की खेती शुरू की। वर्तमान में खेत में खीरे की तुड़ाई का कार्य जारी है और फसल से उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है। वे हर वर्ष समूह के माध्यम से ऋण लेकर मौसम के अनुरूप अलग-अलग सब्जियों एवं फसलों की खेती करती हैं। इनमें बैंगन, टमाटर, खीरा, तरबूज सहित अन्य फसलें शामिल हैं। अलग-अलग कृषि गतिविधियों को अपनाने से उन्हें आय के विविध स्रोत मिले हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है।
समूह से जुड़कर बदली सोच और आत्मविश्वास
श्रीमती कल्पना सिंह के लिए बिहान से जुड़ना केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने उनके व्यक्तित्व और आत्मविश्वास में भी सकारात्मक बदलाव किया है। वे बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले वे अधिकतर घर तक ही सीमित रहती थीं। घर से बाहर निकलने, बाजार जाने और लोगों से बातचीत करने में उन्हें झिझक और संकोच महसूस होता था।
स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बैंकिंग, बाजार से जुड़ी गतिविधियों और कृषि व्यवसाय की बारीकियों को समझना शुरू किया। अब वे बिना किसी झिझक के लोगों से बातचीत करती हैं, अपने हित-अहित को समझती हैं और बैंक तथा बाजार से जुड़े कार्य स्वयं करने में सक्षम हैं। पहले जहां उनका दायरा घर और चूल्हा-चैका तक सीमित था, वहीं आज वे कृषि उत्पादन से लेकर बाजार तक की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।
कृषि गतिविधियों से ‘लखपति दीदी’ बनने की ओर कदम
श्रीमती कल्पना सिंह कहती हैं कि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से समय-समय पर ऋण लेकर अलग-अलग सब्जियों की खेती करने से उनकी आमदनी में वृद्धि हुई है। नियमित रूप से कृषि गतिविधियों को अपनाने और मेहनत के बल पर वे अब ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ उनमें निर्णय लेने और अपने कार्यों को स्वयं संचालित करने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि बिहान से जुड़ने के बाद महिलाओं को अपनी क्षमता पहचानने और उसे आजीविका में बदलने का अवसर मिल रहा है। समूह के माध्यम से महिलाएं आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्वयं भी आत्मनिर्भर बन रही हैं।
योजना के लिए मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
कल्पना सिंह ने बिहान योजना के माध्यम से महिलाओं को आजीविका से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समूह के माध्यम से मिले सहयोग और अवसरों ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। आज वे आत्मविश्वास के साथ कृषि कार्य कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।
बिहान योजना के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को ऋण, प्रशिक्षण और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रही है। कल्पना सिंह की कहानी इसी बदलाव की एक प्रेरक मिसाल है, जहां समूह से जुड़ाव ने उन्हें घर की चारदीवारी से आगे बढ़ाकर कृषि उद्यमिता, बाजार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाया है।
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