नई दिल्ली (वीएनएस)। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कथित एकतरफा निर्णय प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। मंगलवार को वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष रखा, जिसके बाद अदालत ने याचिका को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने को कहा।
याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को मिली सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले कर सकते हैं। याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग में सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।
अनुच्छेद 324 और 2023 के कानून का दिया हवाला
याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों के संचालन, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति ‘चुनाव आयोग’ में निहित है, न कि किसी एक पदाधिकारी में। इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 18 का हवाला देते हुए सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।
याचिका के मुताबिक, आयोग के भीतर जहां तक संभव हो सहमति से निर्णय लिए जाने चाहिए और मतभेद की स्थिति में बहुमत के आधार पर फैसला किया जाना चाहिए।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी जिक्र
याचिका में चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कथित लिखित आपत्तियों और फाइल नोटिंग का हवाला दिया गया है। इसमें दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों आयुक्तों ने कम से कम 14 मौकों पर कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्ति दर्ज कराई।
इनमें कथित तौर पर बिना आयोग की मंजूरी आदेश जारी करना, बैठकों से पहले एजेंडा और बाद में कार्यवाही का विवरण उपलब्ध न कराना, विदेश यात्राओं की मंजूरी, फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची के डेटाबेस तक पहुंच और पश्चिम बंगाल में ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील दायर करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
याचिका में मतदाता सूची के डेटाबेस के केंद्रीकरण और चुनाव आयोग के आईटी विभाग में जिम्मेदारियों के बदलाव से संबंधित आपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है।
SIR से जुड़े फैसलों पर भी सवाल
याचिका में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसलों, निर्देशों और अन्य कार्रवाइयों की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और कथित विवादित फैसलों की न्यायिक जांच की मांग की है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर कहा है कि आयुक्तों के बीच आंतरिक मतभेद को संस्थागत टूट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आयोग का कहना है कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में आंतरिक टिप्पणियां और आपत्तियां प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है। अदालत अब अगले सप्ताह मामले की सुनवाई करेगी, जहां चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, अनुच्छेद 324 के तहत शक्तियों और 2023 के कानून में निर्धारित सामूहिक निर्णय व्यवस्था से जुड़े सवालों पर पक्ष रखा जाएगा।
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